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विधायकों की अयोग्यता याचिका खारिज

  •     बीजद ने हाईकोर्ट का रुख किया

  •     विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी के उस फैसले को दी चुनौती

भुवनेश्वर। विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) ने विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी के उस फैसले को ओडिशा हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें पार्टी के आठ विधायकों की अयोग्यता की मांग वाली याचिका खारिज कर दी गई थी। इन विधायकों पर मार्च में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी के निर्देशों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया था।

बीजद की मुख्य सचेतक और वरिष्ठ विधायक प्रमिला मल्लिक ने शुक्रवार को बताया कि उन्होंने गुरुवार को हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा अध्यक्ष ने पार्टी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना ही याचिका खारिज कर दी।

मल्लिक ने संवाददाताओं से कहा कि पार्टी ने आठ विधायकों को पार्टी विरोधी गतिविधियों और सामूहिक निर्णय की अवहेलना के आधार पर अयोग्य ठहराने की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि अध्यक्ष ने बीजद को सुनवाई का अवसर दिए बिना याचिका खारिज कर दी।

विधानसभा अध्यक्ष ने जून में राज्यसभा चुनाव में कथित क्रॉस वोटिंग को लेकर बीजद और कांग्रेस की ओर से दायर अलग-अलग अयोग्यता याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इन याचिकाओं में कुल 11 विधायकों, बीजद के आठ और कांग्रेस के तीन, को अयोग्य ठहराने की मांग की गई थी।

बीजद ने आरोप लगाया था कि उसके विधायकों चक्रमणि कन्हर, देवी रंजन त्रिपाठी, अरविंद महापात्र, सनातन महाकुड़, सुभासिनी जेना, नव किशोर मल्लिक और सौविक बिस्वाल समेत अन्य ने पार्टी के आधिकारिक रुख के विपरीत आचरण कर संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दलबदल विरोधी प्रावधानों का उल्लंघन किया।

19 जून को जारी विधानसभा सचिवालय की अधिसूचना में बीजद की याचिकाओं को “अस्पष्ट, अनिश्चित और असमर्थित” बताया गया था। अधिसूचना में कहा गया था कि याचिकाएं वैधानिक आवश्यकताओं को पूरा नहीं करती हैं और सदस्यों की अयोग्यता से संबंधित ओडिशा विधानसभा के सदस्यों के नियम, 1987 के तहत निर्धारित अनिवार्य सत्यापन संबंधी प्रावधानों का भी पालन नहीं किया गया।

कांग्रेस ने अलग से अपने तीन विधायकों, सोफिया फिरदौस, रमेश जेना और दशरथ गमांग, को अयोग्य ठहराने की मांग की थी।

ओडिशा से राज्यसभा की चार सीटों के लिए 16 मार्च को हुए चुनाव में इन 11 विधायकों पर क्रॉस वोटिंग करने का आरोप लगा था। बीजद ने कांग्रेस और माकपा के साथ समझौते के तहत यूरोलॉजिस्ट डॉ. दत्तेश्वर होता को संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार बनाया था।

हालांकि, होता भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय से चुनाव हार गए। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि उसके कुछ विधायकों द्वारा की गई क्रॉस वोटिंग ने चुनाव परिणाम को प्रभावित किया।

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