भुवनेश्वर:ओडिशा के बालासोर जिले के तटीय क्षेत्र से हाल ही में रेस्क्यू किए गए पांच अनाथ ओरंगुटान के बच्चे नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में तेजी से रिकवर कर रहे हैं। मां के दुलार से वंचित इन नन्हें जीवों को सुरक्षित माहौल देने और उनके अकेलेपन को दूर करने के लिए विशेष प्लश टॉय (सॉफ्ट टॉयज) दिए गए हैं।
लगभग एक वर्ष की आयु वाले इन तीन नर और दो मादा प्राइमेट्स को पश्चिम बंगाल की सीमा के पास भोगराई-तालसारी तटीय बेल्ट से लावारिस हालत में बरामद किया गया था। रेस्क्यू के बाद वन विभाग के अधिकारियों ने इन्हें तुरंत चिड़ियाघर के सेंटर फॉर रियरिंग एनिमल बेबीज (CRAB) में शिफ्ट किया, जहां चौबीस घंटे उनकी विशेष पशु चिकित्सा देखरेख की जा रही है।
तनाव को कम करने और मां की गर्ماहट का अहसास कराने के लिए देखभाल करने वालों ने उनके बाड़े में ओरंगुटान जैसे दिखने वाले सॉफ्ट टॉयज रखे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, पांच में से चार बच्चों ने इन खिलौनों को अपना लिया है और वे इनके साथ खेल रहे हैं व लिपट रहे हैं, जबकि एक अन्य बच्चे का अभी लक्षित चिकित्सीय उपचार जारी है।
ओडिशा में इन विदेशी जीवों की अचानक मौजूदगी से एक बड़ा अंतर-राज्यीय तस्करी का मामला सामने आया है, जिसकी जांच शुरू कर दी गई है। चूंकि ओरंगुटान मूल रूप से दक्षिण पूर्व एशिया के बोर्नियो और सुमात्रा के उष्णकटिबंधीय वर्षावनों में पाए जाते हैं, इसलिए राज्य के वन्यजीव अधिकारी, ओडिशा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) मिलकर इस अवैध तस्करी के रूट और उसके असली स्रोत का पता लगाने में जुटे हैं।
फिलहाल, ये सभी बच्चे कड़े आइसोलेशन प्रोटोकॉल के तहत विशेष फॉर्मूला मिल्क, फलों के रस और दूध के आहार पर हैं। राष्ट्रीय वन्यजीव एजेंसियों के अगले निर्देशों के बाद ही इनके दीर्घकालिक पुनर्वास या स्वदेश वापसी पर फैसला लिया जाएगा।
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