कटक,पर्युषण महापर्व की आराधना के तीसरे दिन सामायिक दिवस के अवसर पर तेरापंथ युवक परिषद, कटक के तत्वावधान में अभिनव सामायिक का प्रयोग मुनि भव्य कुमार जी द्वारा करवाया गया ।
तेरापंथ भवन में सामायिक साधकों के मध्य मुनि मोहजीत कुमार जी ने सामायिक शब्द का प्रतिपादन करते हुए कहा कि सामायिक संवर और शोधन की प्रक्रिया है। इस अवधि में क्रियात्मक पाप रूकता है और कृत पापों का शोधन होता है। सामायिक की साधना समता भावों से जुड़ी हुई है। इसमें पापकारी बाहरी प्रवृतियों से मुक्ति होती है। सामायिक में आत्म भाव की स्मृति होती है। सामायिक की साधना में रत व्यक्ति साधुत्व की दिशा में प्रथम चरण न्यास करता है। वह वीतरागता की बानगी के रूप में अपने आप में सन्निहित होता है।
इस अवसर पर मुनि भव्य कुमार जी ने उत्तराध्ययन सूत्र के चित्त-संभूति प्रकरण को गतिमयता प्रदान की।
मुनि जयेश कुमार जी ने सामायिक दिवस की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सामायिक आत्माराधना का महान पथ है। विकृति से संस्कृति की ओर गतिमान होने का अर्थ सामायिक है।सामायिक समता की साधना का महान प्रयोग है। भगवान महावीर के चितंन में हर स्थिति को समता से सहने वाला साधक ही साधना को सिद्धि तक पहुंचा सकता है।कही जगह जहां ऋषिजनों का क्रोधपूर्ण व्यवहार भी मान्य हो जाता है वहीं महावीर कहते हैं जो शांत है वही संत है। श्रावक जन भी सामायिक को सिर्फ एक धार्मिक क्रियाकाण्ड नही अपितु जीवन को समतामय बनाने के कल्पप्रयोग के रूप में साधने का प्रयास करे।
तीर्थंकर दर्शन के अंतर्गत में मुनि जयेश कुमार जी ने प्रभु सुमतिनाथ के जीवन चित्र को उकेरा।
इस अवसर पर अनेक भाई-बहनों ने तप का प्रत्याख्यान किया। अखंड जप अनुष्ठान का क्रम सुचारू ढंग से चल रहा है।
रात्रिकालीन उपक्रम में मुनि जयेश कुमार जी ने इतिहास के बोलते पृष्ठ विषय पर तेरापंथ धर्मसंघ के अद्वितीय व्यक्तित्व शासन महास्तम्भ मुनि श्री हेमराज जी के ऐतिहासिक संस्मरणों की प्रस्तुति दी ।
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