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कोरापुट सांसद सप्तगिरि शंकर उलाका को मिला ‘संसद रत्न पुरस्कार 2026’

  •     ग्रामीण विकास और पंचायती राज क्षेत्र में उत्कृष्ट संसदीय कार्य के लिए सम्मान

  •     18वीं लोकसभा में समिति ने पेश कीं 41 रिपोर्ट

  •     नई दिल्ली में आयोजित 16वें संसद रत्न पुरस्कार समारोह में मिला सम्मान

  •     उलाका ने पुरस्कार को कोरापुट की जनता को समर्पित किया

भुवनेश्वर। कोरापुट से कांग्रेस सांसद सप्तगिरि शंकर उलाका को ग्रामीण विकास और पंचायती राज के क्षेत्र में उत्कृष्ट संसदीय योगदान के लिए ‘संसद रत्न पुरस्कार 2026’ से सम्मानित किया गया है। उन्हें यह सम्मान ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संबंधी संसदीय स्थायी समिति के सभापति के रूप में उनके उल्लेखनीय कार्य के लिए प्रदान किया गया।

नई दिल्ली में आयोजित 16वें संसद रत्न पुरस्कार समारोह में उन्हें यह सम्मान मिला। उलाका की अध्यक्षता में समिति ने 18वीं लोकसभा के दौरान संसद में 41 रिपोर्टें प्रस्तुत कीं। इन रिपोर्टों में ग्रामीण रोजगार, आजीविका, ग्रामीण सड़क, भूमि प्रशासन, आदिवासी अधिकार और जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया।

मनरेगा से लेकर पंचायती राज तक अहम मुद्दों की समीक्षा

संसदीय स्थायी समिति ने अपने कार्यकाल के दौरान महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा), प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई), डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (डीआईएलआरएमपी) सहित ग्रामीण विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं और कार्यक्रमों की समीक्षा की।

समिति ने पंचायती राज संस्थाओं को अधिक प्रभावी और सशक्त बनाने के मुद्दे पर भी व्यापक विचार किया। इसके अलावा पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 यानी पेसा कानून के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई। इसमें ग्राम सभाओं को मजबूत करने और 73वें संविधान संशोधन के तहत वास्तविक अधिकारों के हस्तांतरण को सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

पुरस्कार को कोरापुट की जनता को किया समर्पित

सम्मान प्राप्त करने के बाद सप्तगिरि शंकर उलाका ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पुरस्कार किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि संसदीय समिति के सभी सदस्यों, लोकसभा सचिवालय के अधिकारियों-कर्मचारियों और संबंधित मंत्रालयों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है।

उन्होंने इस सम्मान को कोरापुट की जनता को समर्पित करते हुए कहा कि क्षेत्र के लोगों के विश्वास और समर्थन ने उन्हें संसद में ग्रामीण और आदिवासी समुदायों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने की प्रेरणा दी।

उलाका ने कहा कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने के कारण उन्हें जमीनी स्तर पर समुदायों के सामने आने वाली चुनौतियों को समझने का अवसर मिला है। उनके अनुसार संसदीय समितियों को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर काम करना चाहिए, ताकि सरकार की नीतियां और योजनाएं जमीन पर लोगों के लिए अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकें।

2010 में हुई थी संसद रत्न पुरस्कार की शुरुआत

संसद रत्न पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 2010 में प्राइम प्वाइंट फाउंडेशन ने पूर्व राष्ट्रपति एवं महान वैज्ञानिक डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के सुझाव पर की थी। इन पुरस्कारों का उद्देश्य संसद में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सांसदों और संसदीय समितियों को उनके कार्यों के वस्तुनिष्ठ आंकड़ों के आधार पर सम्मानित करना है।

सप्तगिरि शंकर उलाका को मिला यह सम्मान विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उनकी अध्यक्षता वाली समिति ने ग्रामीण भारत, आदिवासी क्षेत्रों और पंचायती राज व्यवस्था से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों पर संसद के समक्ष विस्तृत रिपोर्टें प्रस्तुत कीं। इससे ग्रामीण विकास, स्थानीय स्वशासन और जमीनी लोकतंत्र को मजबूत करने से जुड़े विषयों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता मिली है।

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