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परंपरागत अधिकारों को लेकर विश्वकर्मा महाराणा कारीगरों का धरना
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मंदिर प्रशासन की नोटिस का विरोध
पुरी। विश्वप्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथयात्रा के लिए चल रहा रथ निर्माण कार्य बुधवार को उस समय अचानक ठप हो गया, जब विश्वकर्मा महाराणा कारीगरों ने अपने परंपरागत अधिकारों की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया।
विवाद रथ निर्माण के बाद बचने वाले लकड़ी के टुकड़ों, जिन्हें स्थानीय रूप से ‘खेई’ और ‘चिराटा’ कहा जाता है, के संग्रहण के अधिकार को लेकर उत्पन्न हुआ है। महाराणा कारीगरों का कहना है कि परंपरा के अनुसार चार फीट से कम लंबाई वाले लकड़ी के टुकड़े उन्हें ‘खेई’ के रूप में दिए जाते रहे हैं। साथ ही, उनका दावा है कि आकार की परवाह किए बिना ‘चिराटा’ लकड़ी एकत्र करने का अधिकार भी उन्हें प्राप्त है।
आमतौर पर महाराणा कारीगर और अन्य सेवायत प्रतिदिन सुबह 8 से 9 बजे के बीच काम शुरू कर देते हैं। लेकिन रथ निर्माण के 58वें दिन रथखाला में काम शुरू नहीं हुआ और पूरा परिसर शांत रहा। कारीगरों ने मंदिर प्रशासन द्वारा ऐसे लकड़ी के टुकड़ों के संग्रहण पर रोक संबंधी नोटिस जारी किए जाने का विरोध किया।
महाराणा कारीगरों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता और विवाद का समाधान नहीं होता, तब तक रथ निर्माण कार्य दोबारा शुरू नहीं किया जाएगा।
इस घटनाक्रम से रथयात्रा की तैयारियों को लेकर चिंता बढ़ गई है, क्योंकि इस महापर्व में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं। विवाद के समाधान और रथ निर्माण कार्य को समय पर पूरा करने के लिए जल्द ही मंदिर प्रशासन और संबंधित पक्षों के बीच चर्चा होने की संभावना है।
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