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रामेश्वरम से पारादीप तक बनेगा नया हाईवे
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खुर्दा, पुरी, केंद्रापड़ा और जगतसिंहपुर को मिलेगा सीधा लाभ
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यात्रा समय ढाई घंटे तक होगा कम
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8,301 करोड़ रुपये की 160 किमी परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी
भुवनेश्वर। ओडिशा के बुनियादी ढांचे को बड़ी मजबूती देते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को राज्य में लगभग 160 किलोमीटर लंबे नए तटीय राजमार्ग के निर्माण को मंजूरी दे दी। यह राजमार्ग रामेश्वरम से पारादीप तक बनाया जाएगा और इसके निर्माण पर 8,300.79 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने इस परियोजना को हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) के तहत दो पैकेजों में स्वीकृति प्रदान की। यह राजमार्ग खुर्दा, पुरी, केंद्रापड़ा और जगतसिंहपुर जिलों से होकर गुजरेगा तथा ओडिशा के तटीय क्षेत्रों को वैकल्पिक और आधुनिक संपर्क सुविधा उपलब्ध कराएगा।
वर्तमान में राष्ट्रीय राजमार्ग-16 गोल्डन क्वाड्रिलेटरल का हिस्सा है और खुर्दा, भुवनेश्वर तथा कटक जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ता है। वहीं भुवनेश्वर-पुरी, पुरी-सातपड़ा और पुरी-कोणार्क के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग-316 पर सड़क की खराब संरचना, मार्ग के किनारे अनियोजित विकास और भारी स्थानीय यातायात के कारण लंबी दूरी की यात्रा प्रभावित होती है। नई परियोजना इन समस्याओं का समाधान करेगी।
परियोजना के पहले पैकेज में रामेश्वरम से कोणार्क तक चार लेन का राजमार्ग बनाया जाएगा, जबकि दूसरे पैकेज में कोणार्क से पारादीप तक दो लेन की सड़क पक्के शोल्डर के साथ विकसित की जाएगी। राजमार्ग को 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति के अनुरूप डिजाइन किया गया है।
परियोजना पूरी होने के बाद रामेश्वरम और पारादीप के बीच यात्रा समय में लगभग ढाई घंटे की कमी आने की उम्मीद है। इससे यात्रियों और मालवाहक वाहनों को तेज, सुरक्षित और निर्बाध आवागमन की सुविधा मिलेगी।
प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना के सिद्धांतों के अनुरूप तैयार की गई यह परियोजना 9 आर्थिक केंद्रों और 5 लॉजिस्टिक केंद्रों को जोड़ने का काम करेगी। इससे क्षेत्र में लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ेगी और देश के लॉजिस्टिक प्रदर्शन सूचकांक (एलपीआई) में भी सुधार होने की संभावना है।
अधिकारियों के अनुसार यह तटीय राजमार्ग ओडिशा के समुद्री क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक विकास को नई गति देगा। बेहतर संपर्क व्यवस्था से ईंधन की खपत और वाहन संचालन लागत में कमी आएगी, जबकि कार्बन उत्सर्जन भी घटेगा। साथ ही पर्यटन, व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने से चारों जिलों के विकास को नई दिशा मिलेगी।
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