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जून से चौबीसों घंटे चलेंगे नियंत्रण कक्ष
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जल संसाधन विभाग की उच्चस्तरीय बैठक में ‘शून्य जनहानि’ लक्ष्य पर जोर
भुवनेश्वर। आगामी मानसून और संभावित बाढ़ की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने तथा लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ओडिशा के जल संसाधन विभाग की उच्चस्तरीय पूर्व-बाढ़ तैयारी समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभाग द्वारा की जा रही विभिन्न तैयारियों और आपदा प्रबंधन उपायों की विस्तार से समीक्षा की गई।
बैठक की अध्यक्षता जल संसाधन विभाग की प्रधान सचिव शुभा शर्मा ने की। इस दौरान मुख्य अभियंता बिभूति भूषण दास भी उपस्थित रहे।
अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश
बैठक में प्रधान सचिव ने कहा कि बाढ़ की स्थिति में आधारभूत संरचना को नुकसान से बचाने और राज्य के ‘शून्य जनहानि’ लक्ष्य को पूरा करने के लिए सभी क्षेत्रीय अधिकारियों और विभागीय इकाइयों को आपसी समन्वय बनाए रखते हुए पूरी तरह सतर्क रहना होगा।
बाढ़ आकस्मिक योजना की हुई समीक्षा
बैठक में विभाग की बाढ़ आकस्मिक योजना के क्रियान्वयन पर विशेष रूप से चर्चा की गई। इस दौरान राज्य के विभिन्न नदी तटबंधों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई तथा पिछले वर्ष की बाढ़ से क्षतिग्रस्त संरचनाओं के मरम्मत और पुनर्स्थापन कार्यों की प्रगति का आकलन किया गया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि मानसून शुरू होने से पहले सभी अधूरे मरम्मत कार्य युद्धस्तर पर पूरे किए जाएं।
जलभराव रोकने और निकासी व्यवस्था सुधारने पर जोर
बैठक में नदी तटबंधों के जलनिकासी द्वारों की कार्यक्षमता जांचने तथा शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव की समस्या दूर करने के लिए निकासी मार्गों से गाद हटाने के कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।
बड़े बांधों में अभ्यास परीक्षण की समीक्षा
राज्य के प्रमुख बांधों में किए गए अभ्यास परीक्षणों के निष्कर्षों की भी समीक्षा की गई। इस दौरान बाढ़ द्वारों की कार्यक्षमता और प्रशासन की तैयारी का मूल्यांकन किया गया।
बाढ़ के पानी के प्रभावी प्रबंधन और नियंत्रण को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों को जल प्रवाह में बाधा बनने वाले अवरोधों को शीघ्र हटाने तथा नदी तल की सफाई और पुनर्निर्माण कार्य तेज करने के निर्देश दिए गए।
जिला प्रशासन और पुलिस से समन्वय पर बल
जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और जनप्रतिनिधियों के साथ पूर्ण समन्वय बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया।
रेत की बोरियां और अन्य सामग्री तैयार रखने के निर्देश
बढ़ते जलस्तर से मुकाबले के लिए रेत की बोरियां, बांस के खंभे और तार जाल जैसी आवश्यक बाढ़-रोधी सामग्रियों की उपलब्धता की समीक्षा की गई।
अधिकारियों को अत्याधुनिक आपात उपकरणों को तुरंत उपयोग के लिए तैयार रखने तथा संवेदनशील और अतिसंवेदनशील क्षेत्रों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखने के निर्देश दिए गए।
बैठक में विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जबकि विभिन्न प्रमुख परियोजनाओं के मुख्य अभियंता आभासी माध्यम से शामिल हुए और अपने-अपने क्षेत्रों की तैयारियों तथा बाढ़ नियंत्रण उपायों की जानकारी दी।
प्रमुख निर्णय
– एक जून से 31 अक्तूबर तक विभागीय खंड, परिक्षेत्र और मुख्य अभियंता कार्यालय स्तर पर विशेष बाढ़ नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे संचालित किए जाएंगे।
– सेचा सदन स्थित मुख्य अभियंता बाढ़ कक्ष तथा राजीव भवन, भुवनेश्वर स्थित राज्य जल विज्ञान आंकड़ा केंद्र का बाढ़ कक्ष भी इसी अवधि में लगातार सक्रिय रहेंगे।
– मुख्य अभियंता की प्रत्यक्ष निगरानी में विशेष निरीक्षण दल मानसून अवधि के दौरान प्रतिदिन दो बार आधिकारिक बाढ़ सूचना जारी करेगा।
– बैठक में पड़ोसी नदी बेसिन राज्यों के साथ जल प्रवाह संबंधी सूचनाओं और आंकड़ों के नियमित आदान-प्रदान तथा समन्वय बनाए रखने पर भी विशेष बल दिया गया।
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