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उमरकोट अदालत का बड़ा फैसला
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पूर्व बीजद ब्लॉक अध्यक्ष भी दोषी करार
नवरंगपुर। ओडिशा के नवरंगपुर जिला में वर्ष 2016 के चर्चित बौंशबेड़ा तिहरे हत्याकांड और आगजनी मामले में उमरकोट अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 19 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
उमरकोट अदालत की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुनीता पटनायक ने शनिवार को इस मामले में सजा का ऐलान किया। दोषियों में एक पूर्व बीजू जनता दल (बीजद) ब्लॉक अध्यक्ष भी शामिल हैं। यह फैसला उमरकोट थाने में दर्ज दो अलग-अलग मामलों में लंबी सुनवाई के बाद आया है।
भूमि विवाद से भड़की थी हिंसा
यह सनसनीखेज घटना 16 जुलाई 2016 को उमरकोट ब्लॉक के बौंशबेड़ा गांव में हुई थी। जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत सरकारी जमीन पर खेती को लेकर हुई थी। स्थानीय आदिवासी समुदाय ने तेलगांव क्षेत्र की सरकारी जमीन पर बलराम हरिजन द्वारा खेती किए जाने का विरोध किया था। बताया गया कि वन विभाग के अधिकारियों की मदद से आदिवासियों ने उस जमीन पर पौधरोपण किया था। आरोप है कि बलराम हरिजन ने उन पौधों को उखाड़ दिया, जिसके बाद इलाके में तनाव फैल गया।
चाकू हमले और गला रेतने से हुई दो लोगों की मौत
घटना के दौरान आदिवासी समुदाय के कुछ लोग बलराम हरिजन के घर पहुंचे और विरोध जताया। आरोप है कि इसी दौरान बलराम ने गुरुबारी भतरा पर चाकू से हमला कर दिया। वहीं दूसरे आरोपी गणपति हरिजन ने फागुनु भतरा का गला रेत दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
गंभीर रूप से घायल गुरुबाड़ू भतरा को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने मृत्युपूर्व बयान दिया। बाद में उपचार के दौरान उसकी भी मौत हो गई।
उग्र भीड़ ने घर में लगाई आग, पीट-पीटकर हत्या
दो लोगों की मौत के बाद गांव में स्थिति और भड़क गई। सैकड़ों ग्रामीणों ने बलराम हरिजन के घर को घेर लिया। आरोप है कि भीड़ ने पत्थरबाजी की और घर में आग लगा दी। जान बचाने के लिए बलराम छत से कूदकर भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन भीड़ ने उसे पकड़ लिया और पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी। घटना के बाद इलाके में भारी तनाव फैल गया था और पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा था।
दो अलग-अलग मामले दर्ज कर हुई थी जांच
तिहरे हत्याकांड और उसके बाद हुई आगजनी एवं भीड़ हिंसा को लेकर उमरकोट थाने में दो अलग-अलग मामले दर्ज किए गए थे। पुलिस जांच और लंबे न्यायिक परीक्षण के बाद अदालत ने 19 लोगों को दोषी ठहराते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
फैसले को माना जा रहा महत्वपूर्ण
करीब एक दशक पुराने इस मामले में आए फैसले को न्यायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि अदालत के निर्णय से पीड़ित परिवारों को न्याय मिला है और कानून व्यवस्था बनाए रखने का स्पष्ट संदेश गया है।
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