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पुरुषोत्तम मास में नंद गांव वृद्ध गौ सेवा आश्रम ने शुरू की “गौ-ग्रास सेवा”

  •  अधिक मास में गौसेवा का विशेष महत्व

  •  17 मई से 15 जून तक चलेगा विशेष सेवा अभियान

  •  श्रद्धालुओं से गौमाताओं की सेवा में सहयोग की अपील

कटक। नंद गांव वृद्ध गौ सेवा आश्रम की ओर से पवित्र अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) के अवसर पर विशेष “गौ-ग्रास सेवा” अभियान शुरू किया गया है। यह सेवा कार्यक्रम 17 मई से 15 जून 2026 तक चलेगा, जिसमें श्रद्धालु अपने नाम और गोत्र के अनुसार वृद्ध गौमाताओं की सेवा का संकल्प लेकर पुण्य अर्जित कर सकेंगे।
आश्रम की ओर से बताया गया कि अधिक मास भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय माना जाता है और शास्त्रों में गौमाता को विष्णु स्वरूप तथा 33 कोटी देवी-देवताओं का निवास बताया गया है। ऐसे में इस पवित्र मास में गौसेवा और दान का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है।
गौसेवा से मिलते हैं आध्यात्मिक और पारिवारिक लाभ
आश्रम से जुड़े सेवकों ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार अधिक मास में गौमाता को चारा खिलाने, पानी पिलाने और उनकी सेवा करने से नकारात्मक कर्मों का नाश होता है तथा पूर्व जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है।
इसके साथ ही गौसेवा और गौदान से पितरों को शांति मिलने, परिवार में सुख-समृद्धि आने और जीवन की बाधाएं दूर होने की मान्यता भी है। श्रद्धालु इस दौरान गौमाता को अन्न, हरा चारा और गुड़ अर्पित कर विशेष पुण्य प्राप्त करते हैं।
ब्राह्मणों द्वारा संकल्प के साथ होगी सेवा
नंद गांव गौशाला में अधिक मास के दौरान वृद्ध गौमाताओं के लिए “गौ-ग्रास सेवा” विशेष रूप से आयोजित की जा रही है। श्रद्धालुओं के नाम और गोत्र के अनुसार ब्राह्मणों द्वारा संकल्प कराकर सेवा करवाई जाएगी। आश्रम की ओर से विभिन्न स्तरों पर सेवा सहयोग राशि निर्धारित की गई है। इसके तहत 51 गौमाताओं की सेवा के लिए 1100 रुपये, 101 गौमाताओं के लिए 2100 रुपये, 151 गौमाताओं के लिए 3100 रुपये, 251 गौमाताओं के लिए 5100 रुपये तथा 551 गौमाताओं की सेवा के लिए 11 हजार रुपये निर्धारित किए गए हैं। वहीं 501 गौमाताओं की संपूर्ण सेवा के लिए 15 हजार रुपये सहयोग राशि रखी गई है।
श्रद्धालुओं से सेवा में भागीदारी की अपील
आश्रम प्रबंधन ने अधिक मास के इस विशेष अवसर पर श्रद्धालुओं से गौसेवा में सहभागी बनने की अपील की है। आश्रम से जुड़े पदम भावसिंका, बिनोद अग्रवाल (मुन्ना भाई), हनुमान केड़िया, कमल सिकरिया, गोपाल बंसल, प्रकाश अग्रवाल (छोटू), ज्ञानचंद नाहर और मनोज दुग्गड़ सहित अन्य सेवकों द्वारा इस अभियान का संचालन किया जा रहा है।
आश्रम प्रबंधन का कहना है कि गौसेवा भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है तथा अधिक मास में की गई सेवा को विशेष फलदायी माना गया है।

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