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वर्चुअल माध्यम से ओडिशा के लोगों से धर्मेंद्र प्रधान ने की बात
भुवनेश्वर. 01 अप्रैल 1936 को ओडिशा भाषा के आधार पर बनने वाला पहला राज्य बना था. एक महान लक्ष्य व उद्देश्य को रखकर ओडिशा के महापुरुषों ने इस विशेष राज्य का गठन किया था. उनके इस प्रयास व संघर्ष को ओडिशा के लोग कभी भूल नहीं पाएंगे. 86 में उत्कल दिवस के अवसर पर कोलकाता के हुगली नदी के तट से वर्चुअल प्लेटफार्म के जरिए ओडिशा के लोगों से बात कर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यह बात कही.
उन्होंने इस अवसर पर कहा कि ओडिशा राज्य के गठन को आगामी 2036 को सौ साल पूरा हो जाएगा. उन्होंने इस समय तक ओडिशा को विश्व के समृद्ध राज्य में परिवर्तित करने के लिए संकल्प लेने का आह्वान किया.
इस अवसर पर प्रधान ने ओडिशा प्रदेश गठन के अग्रणी महापुरुषों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने पश्चिम बंगाल के प्रवासी ओड़िया लोगों के साथ राज्य संगीत वंदे उत्कल जननी का गायन किया.
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हम सभी की जिम्मेदारी है कि ओडिशा को 2036 तक समृद्ध राज्य के रूप में विकसित करें.
उन्होंने इस अवसर पर उत्कल गौरव मधुसूदन दास उत्कलमणि गोपबंधु दास, महाराजा श्री राम चंद्र भंजदेव, महाराजा कृष्ण चंद्र गजपति, व्यास कवि फकीर मोहन सेनापति, कविवर राधानाथ राय, स्वभाव कवि गंगाधर मेहर जैसे अनेक महापुरुषों को का नमन किया. उन्होंने कहा कि इन सभी महापुरुषों ने ओडिशा गठन के लिए काफी संघर्ष किया था. उत्कल सम्मेलन का गठन 1903 में हुआ था. इन महापुरुषों द्वारा किये गये निरंतर संघर्ष के कारण सन 1936, 1 अप्रैल को ओडिशा प्रदेश का गठन का सपना साकार हो सका था.
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