
(लेखक विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं)
नई दिल्ली। महाशय धर्मपाल गुलाटी का सम्पूर्ण जीवन जहां संघर्षों से घिरा रहा वहीं, उनके अंदर धार्मिकता व वंचित समाज के प्रति समर्पण का भाव चीर-जीवी रहा। आज पद्मभूषण महाशय धर्मपाल के लिए दिल्ली के कीर्ति नगर में आयोजित एक प्रार्थना सभा के उपरांत मीडिया से बात करते हुए विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री विनोद बंसल ने कहा कि कोई व्यक्ति व्यवसायी होता है तो कोई उद्योग-पति, कोई आध्यात्मिक जगत से जुड़ी हस्ती होती है तो कोई सामाजिक जगत की, कोई मालिक होता है तो कोई मजदूर, किन्तु ये सभी गुण यदि एक साथ देखने हों तो वे सब महाशय धर्मपाल जी में पूरी तरह से विद्यमान थे। उन्होंने पहले अपने ही देश में शरणार्थी के रूप में जीवन जीकर देश विभाजन की विभीषिका को झेला और फिर दिल्ली आकर अपनी मेहनत व लगन के बाल पर एक तांगे वाले से विश्व प्रसिद्ध मसाले वाले तक की यात्रा की। बंसल ने कहा कि महाशय जी की एक बड़ी व खास बात यह थी कि वे अपने जीवन में कभी धर्म-पथ से विमुख नहीं हुए। गरीबों, बँचितों, वनवासियों, गिरिवासियों तथा पिछड़े वर्ग के उत्थान हेतु उन्होंने देश भर में अनेक अनाथालय, विद्यालय, गुरुकुल, मंदिर तथा कौशल विकास के कार्यों को प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से सहयोग किया। दैनिक यज्ञ, हवन, संध्या-वन्दन तथा योग ध्यान व प्राणायाम उन्होंने कभी नहीं छोड़े। शायद इसी बजह से उन्होंने “जीवेम शरद: शतम्..” के अनुसार लगभग सौ वर्ष तक का जीवन जीया। वे एक ऐसे भामाशाह थे कि देश-धर्म के कार्य हेतु उनकी तिजोरी सदैव खुली रहती थी। विश्व हिन्दू परिषद परिवार की ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। हमें आशा है कि उनका परिवार उनकी इस अनुकरणीय धार्मिक व सामाजिक विरासत को भी साथ लेकर चलेगा।
कोविद से सभी तरह के बचावों का ध्यान रखते हुए आयोजित की गई इस प्रार्थना सभा में सैकड़ों लोगों के साथ विहिप दिल्ली के अध्यक्ष श्री कपिल खन्ना ने भी अपने श्रद्धा-सुमन अर्पित किए।
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