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विद्यालयों को बंद करने संबंधी मोसन का शिक्षा मंत्री ने दिया जवाब

  • कहा-अनुसूचित इलाकों में नियमों में दी जाएगी ढील

भुवनेश्वर- छोटे-छोटे विद्यालयों में जहां बच्चों की सख्या कम है, वहां  शिक्षा की गुणवत्ता के स्तर के कम होने के कारण विद्यालयों का एकत्रीकरण की प्रक्रिया चल रही है।  अनुसूचित इलाकों में 20 से कम छात्र वाले स्कूलों को बंद करने का पहले निर्णय लिया गया था, जिसे परिवर्तन कर 15 से कम वाले स्कूलों तक करने का करने पर विचार किया जाएगा। विद्यालय वह जन शिक्षा मंत्री समीर रंजन दास ने विधानसभा में यह जानकारी दी। सत्तारूढ़ पार्टी के मुख्य सचेतक  प्रमिला मलिक द्वारा इस संबंध में लाये गये मोसन का उत्तर देते हुए श्री दास ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे स्कूल होने के कारण उन स्कूलों में शिक्षा का स्तर ठीक नहीं हो रहा था। ऐसे में छोटे स्कूलों को मिलाकर इकट्ठा  करने के लिए जिलों से एक 8272 प्रस्ताव आए थे। राज्य कमेटी के बैठक में 7772 स्कूलों को बंद करने का निर्णय लिया गया था। उन्होंने कहा कि सरकार कोई गलत उद्देश्य रख कर कोई भी काम नहीं किया है ना ही सरकार  कानून से बाहर जाकर भी यह निर्णय  लिया है। छात्र-छात्राओं को गुणात्मक शिक्षा देना उनका प्रमुख लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि राज्य में कम  बच्चों वाले स्कूलों को एकत्रीकरण करने से शिक्षा के स्तर में वृद्धि होने के साथ-साथ बच्चों को उत्तम शैक्षिक वातावरण दिया जा सकेगा।

इससे पहले विपक्ष के विधायकों ने राज्य सरकार के स्कूलों को बंद करने के संबंधी निर्णय का विरोध किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के इस निर्णय से दूरदराज के तथा अनुसूचित इलाकों के बच्चे पढ़ाई से बंचित होंगे। इस पर राज्य सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए।

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