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सभी सीमा-शुल्क प्रक्रियाओं के लिए एकल, एकीकृत और मापनीय प्लेटफॉर्म के रूप में सीमा शुल्क एकीकृत प्रणाली दो वर्ष में शुरू की जाएगी
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विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) अथवा गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाली भारतीय नौकाओं द्वारा पकड़ी गई मछली को शुल्क मुक्त किया जाएगा
सरकार द्वारा सभी सीमा-शुल्क प्रक्रियाओं के लिए एकल, एकीकृत और मापनीय प्लेटफॉर्म के रूप में सीमा शुल्क एकीकृत प्रणाली (सीआईएस) दो वर्ष में शुरू की जाएगी।
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में आज वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट प्रस्तुत करते हुए यह घोषणा की गई। वित्त मंत्री ने कहा कि नॉन इंट्रूसिव स्कैनिंग और उन्नत इमेजिंग तथा जोखिम आकलन हेतु आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रौद्योगिकी का उपयोग सभी प्रमुख पत्तनों में प्रत्येक कंनेटर को स्कैन करने के उद्देश्य से चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
केंद्रीय वित्त मंत्री ने आगे कहा कि विभिन्न सरकारी एजेंसियों से कार्गो अनुमति के लिए अपेक्षित अनुमोदनों की प्रक्रिया को इस वित्त वर्ष के अंत तक एकल और परस्पर जुड़े हुए डिजिटल विंडों के माध्यम से निर्बाध बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि खाद्य, औषधि, पौध, पशु और वन्य जीव उत्पादों जो निषिद्ध कार्गो का 70 प्रतिशत होता है, की अनुमति में शामिल प्रक्रियाओं को अप्रैल 2026 तक लागू कर दिया जाएगा।
वित्त मंत्री ने आगे कहा कि जिन वस्तुओं के लिए कोई अनुपालन लागू नहीं है उन वस्तुओं को आयातक द्वारा ऑनलाइन पंजीकरण पूरा करने के तत्काल बाद सीमा-शुल्क द्वारा, शुल्क के भुगतान के बाद अनुमति दी जाएगी।
निर्यात के नए अवसर: वित्त मंत्री ने कहा कि हमारे जलीय क्षेत्र के बाहर समुद्री संसाधनों के आर्थिक मूल्य का पूर्ण रूप से दोहन करने के लिए भारतीय मछुआरों की सहायता के लिए निम्नलिखित उपाय किए जाएंगे:
- विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) अथवा गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाली भारतीय नौकाओं द्वारा पकड़ी गई मछलियों को शुल्क मुक्त किया जाएगा।
- विदेशी पत्तन पर ऐसी मछलियों को भेजने को निर्यात की गई वस्तुओं की श्रेणी में रखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि मछली पकड़ने और ढुलाई के दौरान दुरुपयोग को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय किए जाएंगे।
वित्त मंत्री ने ई-कॉमर्स के माध्यम से वैश्विक बाजारों में पहुंच के लिए भारत के छोटे व्यवसायों, कारीगरों और स्टार्टअप की आकांक्षाओं को सहायता प्रदान करने के लिए कुरियर निर्यातों पर प्रति खेप 10 लाख रुपये की वर्तमान मूल्य सीमा को पूरी तरह हटाने की घोषणा की। इसके अलावा ऐसी खेपों की पहचान के लिए प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग के माध्यम से अस्वीकृत और वापस लौटाई गई खेपों के प्रबंध में सुधार किया जाएगा।
वित्त मंत्री ने आगे कहा कि ऐसे ईमानदार करदाता हैं, जो अपने सभी बकायों का भुगतान करके विवादों का निपटान करने के इच्छुक होते हैं। किंतु वे दंड से जुड़ी नकारात्मक बातों के कारण ऐसा नहीं कर पाते। अब वे दंड की जगह अतिरिक्त राशि का भुगतान करके अपने मामले खत्म करने में सक्षम होंगे।
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