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भारत वर्ष 2030-31 तक 50(+1)/ 50(-1) प्रतिशत के ऋण –से- जीडीपी अनुपात तक पहुंचने के लक्ष्य के मार्ग पर
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संशोधित अनुमान 2025-26 के अनुसार राजकोषीय घाटा डीजीपी का 4.4 प्रतिशत रहेगा
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संशोधित अनुमान 2025-26 के मुताबिक कुल व्यय 49.6 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें से पूंजीगत व्यय 11 लाख करोड़ रुपये है
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केंद्र की निवल कर प्राप्तियां 26.7 लाख करोड़ रुपये तक हो जाएंगी
ऋण -से- जीडीपी अनुपात
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए कहा, “सरकार निरंतर सामाजिक जरूरतों पर समझौता किए बगैर अपनी राजकोषीय वचनबद्धता को पूरा करती रही है।” इसके अनुरूप, ऋण -से- जीडीपी अनुपात बजट अनुमान 2026-27 में जीडीपी के 55.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो संशोधित अनुमान 2025-26 में जीडीपी का 56.1 प्रतिशत था। गिरता हुआ ऋण -से- जीडीपी अनुपात धीरे-धीरे ब्याज भुगतान पर व्यय को कम करके प्राथमिक क्षेत्र के व्यय के लिए संसाधनों को मुक्त करेगा।
राजकोषीय घाटा
ऋण लक्ष्य के लिए एक मुख्य प्रचालानात्मक उपकरण राजकोषीय घाटे के बारे में श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा, “ मैं इस गरिमामयी सदन को हर्ष के साथ यह सूचित करती हूं कि मैंने 2025-26 तक जीडीपी के 4.5 प्रतिशत से नीचे राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए वित्त वर्ष 2021-22 में की गई अपनी वचनबद्धता को पूरा किया। संशोधित अनुमान 2025-26 में राजकोषीय घाटे का अनुमान जीडीपी के 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो 2025-26 के बजट अनुमान के बराबर है। ऋण समेकन की नई राजकोषीय दूरदर्शिता के अनुरूप बजट अनुमान 2026-27 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3 प्रतिशत होने का अनुमान है।
संशोधित अनुमान 2025-26
वित्त मंत्री ने संसद को सूचित किया कि गैर-ऋण प्राप्तियों का संशोधित अनुमान 34 लाख करोड़ रुपये है जिसमें केंद्र की निवल कर प्राप्तियां 26.7 लाख करोड़ रुपये है। कुल व्यय का संशोधित अनुमान 49.6 लाख करोड़ रुपये है जिसमें पूंजीगत व्यय लगभग 11 लाख करोड़ रुपये है।
बजट अनुमान 2026-27
वित्त मंत्री ने कहा कि गैर-ऋण प्राप्तियां और कुल व्यय का अनुमान क्रमश: 36.5 लाख करोड़ रुपये और 53. 5 लाख करोड़ रुपये है। केंद्र की निवल कर प्राप्तियों का अनुमान 28. 7 लाख करोड़ रुपये है।
सकल बाजार उधारियां
श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा कि राजकोषीय घाटे के वित्त पोषण के लिए दिनांकित प्रतिभूतियों से निवल बाजार उधारी का अनुमान 11.7 लाख करोड़ रुपये है। शेष वित्त पोषण छोटी बचतों और अन्य स्रोतों से आने की संभावना है। सकल बाजार उधारी का अनुमान 17.2 लाख करोड़ रुपये है।
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