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जहाज पर लगे अत्याधुनिक स्वदेशी हथियारों, सेंसर और उपकरणों का प्रदर्शन होगा
नई दिल्ली। रूस के कलिनिनग्राद से भारत के लिए रवाना हुआ भारतीय नौसेना का नवीनतम बहु भूमिका वाला स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस तुशील सेनेगल के डकार बंदरगाह पर पहुंच गया है। यह यात्रा सेनेगल के साथ मौजूदा संबंधों को और मजबूत करेगी तथा दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच बातचीत को बढ़ाएगी। कैप्टन पीटर वर्गीस की कमान में यह जहाज बंदरगाह पर विभिन्न सैन्य और सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेगा। सेनेगल के वरिष्ठ सैन्य और सरकारी अधिकारियों से बातचीत के साथ पैसेज एक्सरसाइज में जहाज पर लगे अत्याधुनिक स्वदेशी हथियारों, सेंसर और उपकरणों का प्रदर्शन किया जायेगा।
रूस में निर्मित भारतीय युद्धपोत आईएनएस तुशील को 9 दिसंबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में नौसेना में शामिल किया गया था। इसकी कमान कैप्टन पीटर वर्गीस के पास है, जिनके साथ 250 कर्मियों की टीम है। भारतीय नौसेना का नवीनतम बहु-भूमिका वाला स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस तुशील 17 दिसंबर को रूस के कलिनिनग्राद से भारत के लिए रवाना हुआ, जो उसकी पहली परिचालन तैनाती की शुरुआत थी। अब यह जहाज अपने गृह बंदरगाह कर्नाटक के कारवार की ओर बढ़ रहा है। यात्रा के दौरान जहाज रास्ते में पड़ने वाले मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ सहयोगी अभ्यास में भाग ले रहा है, जिससे क्षेत्र के देशों के साथ भारत की समुद्री कूटनीति को और बढ़ावा मिलेगा।
नौसेना के कैप्टन विवेक मधवाल ने रविवार को बताया कि भारतीय नौसेना का नवीनतम स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस तुशील परिचालन तैनाती के हिस्से के रूप में 3 जनवरी को सेनेगल के डकार बंदरगाह पर पहुंच गया। यह जहाज दोनों नौसेनाओं के विषय विशेषज्ञों के बीच पारस्परिक रूप से लाभकारी अवसरों के लिए बातचीत करेगा और प्रदर्शन के साथ प्रशिक्षण भी देगा। सेनेगल के उत्साही लोगों के लिए योग का एक उत्साहवर्धक सत्र भी होगा। भारतीय संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए जहाज पर सामाजिक कार्यक्रम होने के बाद पश्चिमी अफ्रीकी तट के जलक्षेत्र में सेनेगल की नौसेना के साथ पैसेज एक्सरसाइज और संयुक्त गश्त में भाग लेगा।
इस अभ्यास का उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ाने और अंतर-संचालन को बढ़ावा देते हुए दोनों नौसेनाओं के बीच समुद्री सहयोग को आगे बढ़ाना है। यह यात्रा इस बात का एक और मजबूत संकेत है कि भारत सेनेगल के साथ अपने संबंधों को कितना महत्व देता है और दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग और मैत्रीपूर्ण संबंधों को और मजबूत करने की उसकी कोशिश क्या है। यह दोनों नौसेनाओं को एक-दूसरे से सीखने और सहयोग के नए रास्ते तलाशने का अवसर भी है।
साभार – हिस
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