नई दिल्ली। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के अध्यक्ष प्रो. टीजी सीताराम ने नई दिल्ली के शास्त्री भवन में शुक्रवार को शैक्षणिक वर्ष 2024-2027 के लिए एआईसीटीई अनुमोदन प्रक्रिया हैंडबुक (एपीएच) जारी की। इस मौके पर एआईसीटीई उपाध्यक्ष अभय जेरे और सदस्य सचिव राजीव कुमार भी मौजूद रहे।
एपीएच में शामिल किए गए नए बदलावों में अच्छा प्रदर्शन करने वाले संस्थानों के लिए अनुमोदन को 3 वर्ष तक बढ़ाने का प्रावधान है। ऐसे संस्थानों द्वारा प्रस्तावित पाठ्यक्रमों एवं कार्यक्रमों के लिए प्रवेश की ऊपरी सीमा में छूट दी गई है। हालांकि संस्थानों को प्रवेश लेने से पहले गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे और योग्य संकाय का प्रदर्शन करना होगा। संबद्ध विश्वविद्यालय को राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेश सरकार से भूमि दस्तावेजों और एनओसी की आवश्यकता से संबंधित अनुपालन में कमी की गई है। संबद्ध विश्वविद्यालयों के अधिकार क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करने वाले मौजूदा संस्थानों के लिए ऑफ-कैंपस प्रावधान की शुरुआत की गई है।
तकनीकी और प्रबंधन शिक्षा में समन्वित विकास सुनिश्चित करने के लिए कंप्यूटर एप्लीकेशन (जैसे बीसीए) और प्रबंधन (जैसे बीबीए/बीएमएस) में स्नातक कार्यक्रम व पाठ्यक्रमों को एआईसीटीई की छत्रछाया में लाया गया है। नियोजित व कार्यरत पेशेवरों के लिए लचीले मोड (समय) के माध्यम से डिप्लोमा, डिग्री व स्नातकोत्तर स्तर पर अपनी शैक्षणिक योग्यता एवं कौशल को उन्नत करने का प्रावधान किया गया है।
प्रो. सीताराम ने मीडियाकर्मियों को बताया कि एआईसीटीई अगले तीन वर्षों के लिए लागू एक अनुमोदन प्रक्रिया पुस्तिका लेकर आया है। हैंडबुक उन प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से बताती है जिनका संस्थानों को तकनीकी और प्रबंधन कार्यक्रम एवं पाठ्यक्रम चलाने के लिए परिषद से अनुमोदन लेते समय पालन करने की आवश्यकता होती है। प्रो. सीताराम ने उन संशोधनों और प्रावधानों पर भी प्रकाश डाला, जिन्हें इस वर्ष शिक्षा की गुणवत्ता, प्रक्रियाओं में सरलता और कार्यान्वयन में पारदर्शिता पर प्राथमिक ध्यान देने के साथ अनुमोदन प्रक्रिया पुस्तिका में शामिल किया गया है।
उन्होंने कहा कि पहली बार एआईसीटीई ने विभिन्न हितधारकों और विशेषज्ञों से राय, सुझाव एवं प्रतिक्रिया लेने के लिए नए एपीएच का मसौदा सार्वजनिक डोमेन में पोस्ट किया। विभिन्न हितधारकों से 600 से अधिक सुझाव और टिप्पणियां प्राप्त हुईं, जिनका एक विशेषज्ञ समिति द्वारा मूल्यांकन किया गया और कई सुझावों को अंतिम मसौदे में शामिल किया गया।
साभार -हिस
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