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संगोष्ठी का विषय ‘पर्यावरण और सतत विकास- न्यायपालिका की भूमिका’ और ‘डिजिटाइजेशन एंड इट्स इम्पैक्ट ऑन द न्याय प्रणाली’
काजीरंगा (असम), राष्ट्रीय उद्यान काजीरंगा में गौहाटी उच्च न्यायालय द्वारा असम सरकार के सहयोग से ‘पर्यावरण और सतत विकास- न्यायपालिका की भूमिका’ और ‘डिजिटाइजेशन एंड इट्स इम्पैक्ट ऑन द न्याय प्रणाली’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन हुआ। उद्घाटन समारोह में राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा भी मौजूद रहे।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय न्यायिक प्रणाली का पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के सिद्धांतों के पालन के क्षेत्र में एक गौरवशाली अतीत है। साथ ही कहा कि काजीरंगा में संगोष्ठी आयोजित करने का निर्णय जैव विविधता के संरक्षण और सतत विकास के बारे में एक मजबूत संदेश देगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर विभिन्न कदम उठाए हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. सरमा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दो मुद्दों को अत्यधिक महत्व देते रहे हैं – डिजिटल प्रणाली के माध्यम से समाज के हर तबके के नागरिकों की सुविधा के लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकियों का उपयोग और पूरी प्रणाली को अधिक कुशल बनाना।
इस कार्यक्रम में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री किरेन रिजिजू, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों में एमआर शाह, सूर्यकांत, एसएस बोपन्ना, एस रवींद्र भट, ऋषिकेश रॉय, बिक्रम नाथ, सीटी रवि कुमार, एमएम सुंदरेश, पीएस नरसिम्हा, गौहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश आरएम छाया, देश के अन्य राज्यों के उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश, उच्चतम न्यायालयों के न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) इंदिरा बनर्जी, गौहाटी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सुमन श्याम, असम नगालैंड, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश के महाधिवक्ता, राज्य के जिला न्यायाधीश, नगालैंड, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश के पंजीयक, गौहाटी उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी तथा न्यायिक अधिकारियों के साथ ही अन्य सम्मानित व्यक्ति मौजूद थे।
साभार-हिस
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