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जिन्‍होंने देश को लूटा है, उनको लौटना पड़ेगा – मोदी

नई दिल्ली। आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने पर लाल किला से झंडोत्तोलन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि इस 25 वर्ष का अमृतकाल के लिए जब हम चर्चा करते हैं, तब मैं जानता हूं चुनौतियां अनेक है, मर्यादाएं अनेक हैं, मुसीबतें भी हैं, बहुत कुछ है, हम इसको कम नहीं आंकते। रास्‍ते खोजते हें, लगातार कोशिश कर रहे हैं लेकिन दो विषयों को तो मैं यहां पर चर्चा करना चाहता हूं। चर्चा अनेक विषयों पर हो सकती है। लेकिन मैं अभी समय की सीमा के साथ दो विषयों पर चर्चा करना चाहता हूं। और मैं मानता हूं हमारी इन सारी चुनौतियों के कारण, विकृतियों के कारण, बिमारियों के कारण इस 25 साल का अमृत काल उस पर शायद अगर हमने समय रहते नहीं चेते, समय रहते समाधान नहीं किए तो ये विकराल रूप ले सकते हैं। और इसलिए मैं सब की चर्चा न करते हुए दो पर जरूर चर्चा करना चाहता हूं। एक है भ्रष्‍टाचार और दूसरा है भाई-भतीजावाद, परिवारवाद। भारत जैसे लोकतंत्र में जहां लोग गरीबी से जूझ रहे हैं जब ये देखते हैं, एक तरफ वो लोग हैं जिनके पास रहने के लिए जगह नहीं है। दूसरी ओर वो लोग हैं जिनको अपना चोरी किया हुआ माल रखने के लिए जगह नहीं है। यह स्थिति अच्‍छी नहीं है दोस्तों। और इ‍सलिए हमें भ्रष्‍टाचार के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ना है। पिछले आठ वर्षों में direct benefit transfer के द्वारा आधार, mobile इन सारी आधुनिक व्‍यवस्‍थाओं का उपयोग करते हुए दो लाख करोड़ रुपये जो गलत हाथों में जाते थे, उसको बचाकर के देश की भलाई के लिए लगाने में हम सफल हुए। जो लोग पिछली सरकारों में बैंकों को लूट-लूट कर के भाग गए, उनकी सम्‍पत्त्यिां जब्‍त कर के वापिस लाने की कोशिश कर रहे हैं। कईयों को जेलों में जीने के लिए मजबूर कर के रखा हुआ है। हमारी कोशिश है जिन्‍होंने देश को लूटा है उनको लौटना पड़े वो स्थिति हम पैदा करेंगे।

भाईयो और बहनों, अब भ्रष्‍टाचार के खिलाफ मैं साफ देख रहा हूं कि हम एक निर्णायक कालखंड में कदम रख रहे हैं। बड़े-बड़े भी बच नहीं पाएंगे। इस मिजाज के साथ भ्रष्‍टाचार के खिलाफ एक निर्णायक कालखंड में अब हिन्‍दुस्‍तान कदम रख रहा है। और मैं लाल किले की प्राचीर से बड़ी जिम्मेवारी के साथ कह रहा हूं। और इसलिए, भाईयों-बहनों भ्रष्‍टाचार दीमक की तरह देश को खोखला कर रहा है। मुझे इसके खिलाफ लड़ाई लड़नी है, लड़ाई को तेज करना है, निर्णायक मोड़ पर इसे लेकर के ही जाना है। तब मेरे 130 करोड़ देशवासी, आप मुझे आर्शिवाद दीजिए, आप मेरा साथ दीजिए, मैं आज आप से साथ मांगने आया हूं, आपका सहयोग मांगने आया हूं ताकि मैं इस लड़ाई को लड़ पाऊं। इस लड़ाई को देश जीत पाए और समान्‍य नागरिक की जिंदगी भ्रष्‍टाचार ने तबाह करके रखी हुई है। मैं मेरे इन समान्‍य नागरिक की जिंदगी को फिर से आन, बान, शान के लिए जीने के लिए रास्‍ता बनाना चाहता हूं। और इसलिए, मेरे प्‍यारे दशवासियों यह चिंता का विषय है कि आज देश में भ्रष्‍टाचार के प्रति नफरत तो दिखती है, व्‍यक्‍त भी होती है लेकिन कभी-कभी भ्रष्‍टाचारियों के प्रति उदारता बरती जाती है, किसी भी देश में यह शोभा नहीं देगा।

और कई लोग तो इतनी बेशर्मी तक चले जाते हैं कि कोर्ट में सजा हो चुकी हो, भ्रष्‍टाचारी सिद्ध हो चुका हो, जेल जाना तय हो चुका हो, जेल गुजार रहे हो, उसके बावजूद भी उनका महिमामंडन करने में लगे रहते हैं, उनकी शान-ओ-शौकत में लगे रहते हैं, उनकी प्रतिष्‍ठा बनाने में लगे रहते हैं। अगर जब तक समाज में गंदगी के प्रति नफरत नहीं होती है, स्‍चछता की चेतना जगती नहीं है। जब तक भ्रष्‍टाचार और भ्रष्‍टाचारी के प्रति नफरत का भाव पैदा नहीं होता है, सामाजिक रूप से उसको नीचा देखने के लिए मजबूर नहीं करते, तब तक यह मानसिकता खत्‍म होने वाली नहीं है। और इसलिए भ्रष्‍टाचार के प्रति भी और भ्रष्‍टाचारियों के प्रति भी हमें बहुत जागरूक होने की जरूरत है।

दूसरी एक चर्चा मैं करना चाहता हूं भाई-भतीजावाद, और जब मैं भाई-भतीजावाद परिवारवाद की बात करता हूं तो लोगों को लगता है मैं सिर्फ राजनीति क्षेत्र की बात करता हूं। जी नहीं, दुर्भाग्‍य से राजनीति क्षेत्र की उस बुराई ने हिन्‍दुस्‍तान की हर संस्‍थाओं में परिवारवाद को पोषित कर दिया है। परिवारवाद हमारी अनेक संस्‍थाओं को अपने में लपेटे हुए है। और इसके कारण मेरे देश के talent को नुकसान होता है। मेरे देश के सामर्थ्‍य को नुकसान होता है। जिनके पास अवसर की संभावनाएं हैं वो परिवारवाद भाई-भतीजे के बाद बाहर रह जाता है। भ्रष्‍टाचार का भी कारण यह भी एक बन जाता है, ताकि उसका कोई भाई-भतीजे का आसरा नहीं है तो लगता है कि भई चलो कहीं से खरीद करके जगह बना लूं। इस परिवारवाद से भाई-भतीजावाद से हमें हर संस्‍थाओं में एक नफरत पैदा करनी होगी, जागरूकता पैदा करनी होगी, तब हम हमारी संस्‍थाओं को बचा पाएंगे। संस्‍थाओं के उज्ज्वल भविष्‍य के लिए बहुत आवश्‍यक है। उसी प्रकार से राजनीति में भी परिवारवाद ने देश के सामर्थ्‍य के साथ सबसे ज्‍यादा अन्‍याय किया है। परिवारवादी राजनीति परिवार की भलाई के लिए होती है उसको देश की भलाई से कोई लेना-देना नहीं होता है और इसलिए लालकिले की प्राचीर से तिरंगे झंडे के आन-बान-शान के नीचे भारत के संविधान का स्‍मरण करते हुए मैं देशवासियों को खुले मन से कहना चाहता हूं, आइये हिन्‍दुस्‍तान की राजनीति के शुद्धिकरण के लिए भी, हिन्‍दुस्‍तान की सभी संस्‍थाओं की शुद्धिकरण के लिए भी हमें देश को इस परिवारवादी मानसिकता से मुक्ति दिला करके योग्‍यता के आधार पर देश को आगे ले जाने की ओर बढ़ना होगा। यह अनिवार्यता है। वरना हर किसी का मन कुंठित रहता है कि मैं उसके लिए योग्‍य था, मुझे नहीं मिला, क्‍योंकि मेरा कोई चाचा, मामा, पिता, दादा-दादी, नाना-नानी कोई वहां थे नहीं। यह मन:स्थिति किसी भी देश के लिए अच्‍छी नहीं है।

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