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अंतरधार्मिक विवाह के मामलों में सिर्फ शादी के आधार पर एफआईआर नहीं हो सकती: हाईकोर्ट
अहमदाबाद,गुजरात विधानसभा में इसी साल एक अप्रैल को पारित गुजरात धर्म की स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक- 2021 (लॉ ऑफ लव-जिहाद) के खिलाफ एक याचिका पर हाई कोर्ट ने इस अधिनियम की चार धाराओं के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने साफ कहा है कि बगैर जांच के साबित हुए बगैर इन धाराओं में सीधे एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती।
गुरुवार को हाई कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करने के बाद गुजरात धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम की धारा 3, 4, 5 और 6 में सीधे रिपोर्ट दर्ज करने पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि अंतरधार्मिक विवाह के मामलों में केवल विवाह के आधार पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा सकती है। जांच के दौरान विवाह के लिए जबरदस्ती कराने या लालच साबित होने पर ही इन धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है।
दरअसल, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बाद गुजरात में 15 जून से बहुचर्चित लव-जिहाद एक्ट लागू हो गया है। रूपाणी राज्य सरकार ने 01 अप्रैल को विधानसभा में गुजरात धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम 2021 को पारित किया था। मई माह में राज्यपाल देवव्रत आचार्य की मंजूरी मिलने के बाद यह लागू हो गया था। इस कानून के मुख्य प्रावधान के अनुसार अब किसी भी ऐसे व्यक्ति के खिलाफ अपराध दर्ज किया जाएगा, जो शादी के उद्देश्य से धर्मांतरण करता है।
साभार – हिस
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