इस्लामाबाद। पाकिस्तान के संघीय संवैधानिक न्यायालय (एफसीसीपी) ने फैसला सुनाया है कि 27वें संविधान संशोधन के बाद देश के उच्चतम न्यायालय के पास अब संविधान और कानूनों का मतलब निकालने का अधिकार नहीं है। न्यायमूर्ति आमिर फारूक ने यह अहम फैसला सुनाते हुए साफ किया कि 27वें संविधान संशोधन से पहले उच्चतम न्यायालय के पास संविधान और कानूनी नियमों का मतलब निकालने का अधिकार था। अब यह अधिकार सिर्फ संघीय संवैधानिक न्यायालय के पास है।
दुनिया न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार संघीय संवैधानिक न्यायालय ने यह भी कहा कि वह कानून की संवैधानिक वैधता की भी समीक्ष कर सकता है और उसे मतलब निकालने से जुड़े किसी भी मामले के रिकॉर्ड तलब करने का अधिकार है। यह फैसला एक सेल्स टैक्स केस के संदर्भ में आया है। न्यायमूर्ति फ़ारूक ने इस बात पर ज़ोर दिया कि 27वें संशोधन ने कानूनी मतलब निकालने और कानून की समीक्षा करने की उच्चतम न्यायालय की शक्तियों को असरदार तरीके से हटा दिया है। इस फैसले को पाकिस्तान के न्यायिक इतिहास में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
इससे पहले 11 फरवरी को संघीय संवैधानिक न्यायालय ने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय को डॉ. आफिया सिद्दीकी केस में प्रधानमंत्री और संघीय मंत्रियों के खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई शुरू करने से रोक दिया था।
उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में नवंबर 2025 में 27वां संविधान संशोधन पारित हुआ था। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने 13 नवंबर 2025 को इस विधेयक पर हस्ताक्षर किए थे।
साभार – हिस
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