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नीतिगत अनुसंधान और सलाह का नया केंद्र बनेगा एसआईटीआई
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मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष होंगे
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‘समृद्ध ओडिशा 2036’ और ‘विकसित भारत 2047’ लक्ष्य पर फोकस
भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने राज्य के विकास को नई दिशा देने के लिए स्टेट प्लानिंग बोर्ड को समाप्त कर उसकी जगह स्टेट इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मेटिव इनिशिएटिव्स (एसआईटीआई ओडिशा) के गठन की घोषणा की है। इस संबंध में योजना एवं समन्वय विभाग ने आधिकारिक प्रस्ताव जारी कर दिया है।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी एसआईटीआई ओडिशा की गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष होंगे। यह संस्थान राज्य का शीर्ष नीतिगत अनुसंधान और सलाहकार निकाय के रूप में कार्य करेगा। सरकार का उद्देश्य इसे ‘समृद्ध ओडिशा 2036’ और ‘विकसित भारत 2047’ के विजन के अनुरूप विकसित करना है।
अधिकारियों के अनुसार, एसआईटीआई ओडिशा रणनीतिक नीतिगत सोच, नवाचार, सहकारी संघवाद और मापनीय परिणामों पर आधारित एक आधुनिक ढांचा तैयार करेगा।
राज्य सरकार को छह प्रमुख क्षेत्रों में मार्गदर्शन देगा
यह राज्य सरकार को छह प्रमुख क्षेत्रों, अर्थव्यवस्था एवं वित्त, ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं आजीविका, रोजगार एवं शहरी विकास, आइडिएशन एवं नवाचार, ऊर्जा परिवर्तन तथा पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधन, में मार्गदर्शन देगा।
कैबिनेट रैंक का एक उपाध्यक्ष
गवर्निंग काउंसिल में कैबिनेट रैंक का एक उपाध्यक्ष, राज्य मंत्री स्तर के चार पूर्णकालिक सदस्य, नौ पदेन सदस्य और दो विशेष आमंत्रित सदस्य शामिल होंगे। विकास आयुक्त-सह-अतिरिक्त मुख्य सचिव सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे, जबकि एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को निश्चित कार्यकाल के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया जाएगा।
इसके अलावा, संस्थान में एक प्रोग्राम डायरेक्टर, बहु-विषयक प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन यूनिट (पीआईयी) और एक प्रशासनिक इकाई भी होगी। साथ ही, स्टेट मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन ऑफिस (एसएमईओ) को एक संलग्न कार्यालय के रूप में स्थापित किया जाएगा, जो साक्ष्य-आधारित शासन के लिए नोडल संस्था का कार्य करेगा।
वर्ष में कम से कम एक बार बैठक
एसआईटीआई ओडिशा योजना एवं समन्वय विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करेगा और प्रगति की समीक्षा के लिए वर्ष में कम से कम एक बार बैठक आयोजित करेगा।
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