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6 विधायकों की सदस्यता खत्म कराने सुप्रीम कोर्ट तक जाएगी पार्टी
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विधायकों का पलटवार- समय देगा अंतिम फैसला
भुवनेश्वर। राज्यसभा चुनाव में कथित क्रॉस वोटिंग के आरोप में छह विधायकों को निलंबित करने के बाद बीजू जनता दल ने सख्त रुख अपनाते हुए उनकी सदस्यता रद्द कराने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने का ऐलान किया है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि जरूरत पड़ने पर मामला उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया जाएगा।
स्पीकर से सदस्यता रद्द करने की मांग
पार्टी प्रवक्ता डॉ लेनिन मोहंती ने शंख भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर निलंबित विधायकों पर पार्टी और राज्य के साथ विश्वासघात का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पार्टी स्पीकर को पत्र लिखकर इन विधायकों की सदस्यता समाप्त करने की मांग करेगी।
विधायकों का पलटवार, बयानबाजी तेज
वहीं निलंबित विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कटक-चौद्वार के विधायक सौविक बिस्वाल ने अपने पिता प्रभात बिस्वाल के अपमान का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वह इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि निलंबन के बजाय निष्कासन होता तो वह ज्यादा संतुष्ट होते।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनसे संतृप्त मिश्र के पक्ष में वोट देने का दबाव बनाया गया, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया।
मैंने बीजू की विरासत के लिए वोट दिया
बालिगुड़ा विधायक चक्रमणि कन्हार ने किसी भी तरह के विश्वासघात से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने बीजू की विरासत के लिए मतदान किया। उन्होंने दावा किया कि राज्यसभा चुनाव के लिए कोई व्हिप जारी नहीं हुआ था और उन्होंने पार्टी निर्देश के अनुसार एक वोट तथा दूसरा स्वतंत्र उम्मीदवार को दिया।
बस्ता में बगावत, नेताओं के इस्तीफे
बस्ता की विधायक सुभासिनी जेना ने कहा कि जनता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है और उन्होंने जो भी किया, अपने समर्थकों के हित में किया। उनके निलंबन के बाद बस्ता क्षेत्र में विरोध बढ़ गया है और कई नेताओं व कार्यकर्ताओं ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।
वीके पांडियन के खिलाफ प्रदर्शन
बांकी विधायक देवी रंजन त्रिपाठी के समर्थकों ने कटक में प्रदर्शन करते हुए वीके पांडियन का पुतला फूंका और पांडियन गो बैक के नारे लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पांडियन अब भी पार्टी को नियंत्रित कर रहे हैं और बीजू की विरासत को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।
पार्टी का सख्त रुख बरकरार
बीजद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष देवी प्रसाद मिश्र ने कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा कि पार्टी संविधान अनुशासनहीनता के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति देता है। उन्होंने बताया कि यह फैसला पीएसी बैठक में लिया गया था, जिसकी अध्यक्षता नवीन पटनायक ने की थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी स्पीकर के पास विधायकों की अयोग्यता की मांग करेगी और जरूरत पड़ने पर अदालत का दरवाजा खटखटाएगी।
ओडिशा की राजनीति में बढ़ी हलचल
इस पूरे घटनाक्रम से ओडिशा की राजनीति में नई अस्थिरता देखने को मिल रही है। निलंबित विधायकों ने कहा है कि अंतिम फैसला समय करेगा, जबकि बीजू जनता दल ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मामले को विधानसभा से लेकर अदालत तक अंजाम तक पहुंचाएगी।
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