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भाजपा के दो, बीजद के एक, बीजद-कांग्रेस के एक साझा समर्थित और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने नामांकन पत्र किया दाखिल
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विधानसभा के अंकगणित के बीच तेज सियासी सरगर्मी, चार सीटों पर दिलचस्प मुकाबला
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नामांकन दाखिल करने वाले उम्मीदवार
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भाजपा के मनमोहन सामल व सुजीत कुमार अधिकृत उम्मीदवार, निर्दलीय दिलीप राय को समर्थन; बीजद ने संतृप्त मिश्र पर दांव लगाया, डॉ दत्तेश्वर होता को साझा समर्थन
भुवनेश्वर। ओडिशा में राज्यसभा की चार सीटों पर पांच नामांकन पत्र दाखिल किए जाने के साथ ही चुनाव को लेकर आज राजनीतिक हलचल चरम पर पहुंच गई है। भाजपा की ओर से मनमोहन सामल व सुजीत कुमार ने अधिकृत उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया है, जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर पर्चा भरा है। भाजपा ने चौथी सीट के लिए दिलीप राय को समर्थन देने का संकेत दिया है।
वहीं बीजद ने संतृप्त मिश्र को अपना अधिकृत उम्मीदवार बनाया है। इसके साथ ही दत्तेश्वर होता ने कांग्रेस और बीजद के समर्थन से नामांकन दाखिल कर मुकाबले को और रोचक बना दिया है।
विधानसभा की गणित बनेगी निर्णायक
147 सदस्यीय ओडिशा विधानसभा में भाजपा के पास 79 विधायक हैं और तीन निर्दलीयों का समर्थन भी उसे प्राप्त है। इस आधार पर भाजपा तीन सीटों पर अपनी दावेदारी मजबूत मान रही है। बीजद के पास लगभग 50 विधायक हैं और वह एक सीट पर जीत सुनिश्चित करने की रणनीति में है। 14 विधायकों वाली कांग्रेस की भूमिका भी इस चुनाव में अहम मानी जा रही है, जिससे चौथी सीट का मुकाबला दिलचस्प हो गया है।
अनुभव बनाम रणनीति
मनमोहन सामल को संगठनात्मक अनुभव का मजबूत चेहरा माना जाता है। सुजीत कुमार पुनर्निर्वाचन की कोशिश में हैं और हाल में भाजपा में शामिल हुए हैं। दिलीप राय अपने लंबे राजनीतिक अनुभव और पूर्व राज्यसभा कार्यकाल के आधार पर महत्वपूर्ण उम्मीदवार माने जा रहे हैं।
दूसरी ओर, संतृप्त मिश्र को बीजद का भरोसेमंद चेहरा बताया जा रहा है। डॉ दत्तेश्वर होता की उम्मीदवारी को विपक्षी दलों के बीच समन्वय का संकेत माना जा रहा है।
नामांकन के दौरान दिखी राजनीतिक एकजुटता
नामांकन के समय बीजद प्रमुख नवीन पटनायक, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भक्त दास, कांग्रेस विधायक दल के नेता नरसिंह मिश्र और कई विधायक मौजूद रहे। नेताओं की उपस्थिति ने चुनाव की गंभीरता और संभावित राजनीतिक समीकरणों का संकेत दिया।
नवीन पटनायक ने एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि समय ही आगे की दिशा तय करेगा। वहीं भक्त दास ने इसे प्रगतिशील ताकतों के साथ आने का महत्वपूर्ण कदम बताया। संतृप्त मिश्र ने लोकतंत्र में सभी उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने के अधिकार की बात कही।
नामांकन से पहले दिलीप राय ने बीजू बाबू को श्रद्धांजलि अर्पित की
नामांकन दाखिल करने से पहले दिलीप राय ने अपने मेंटर और महान नेता बीजू पटनायक को उनकी जयंती के अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने उम्मीद जताई कि भले ही उनके पक्ष में आवश्यक 30 प्रथम पसंद मत न हों, वे विजयी होंगे। उन्होंने 2002 में क्रॉस वोटिंग के माध्यम से राज्यसभा की सीट जीतने का उदाहरण भी याद दिलाया।
मनमोहन सामल 22 वर्षों के बाद राज्यसभा में प्रवेश करेंगे
भाजपा के पहले उम्मीदवार और राज्य अध्यक्ष मनमोहन सामल 22 वर्षों के बाद राज्यसभा में प्रवेश करेंगे। पूर्व राज्य मंत्री सामल ने 2024 के विधानसभा चुनाव में हार का सामना किया था, लेकिन जुलाई 2025 में भाजपा के राज्य अध्यक्ष के रूप में चौथे कार्यकाल के लिए निर्विरोध चुने गए। उनका नेतृत्व 2024 के ओडिशा विधानसभा चुनाव में पार्टी की ऐतिहासिक जीत और बीजद के 24 साल के शासन का अंत करने में महत्वपूर्ण माना गया। साथ ही, उन्होंने पिछले साल नुआपाड़ा उपचुनाव में भी भाजपा की सफलता सुनिश्चित की। दूसरे भाजपा उम्मीदवार सुजीत कुमार वर्तमान में राज्यसभा सदस्य हैं और अप्रैल में उनका कार्यकाल समाप्त होने वाला है। कुमार ने सितंबर 2025 में भाजपा जॉइन की थी और वे राज्य का प्रतिनिधित्व जारी रखने के लिए फिर से चुनाव लड़ रहे हैं।
संसद में बदलेगा शक्ति संतुलन
राज्यसभा की इन सीटों पर परिणाम न केवल ओडिशा बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी असर डालेंगे। भाजपा तीन प्रतिनिधि भेजकर संसद में अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश में है, जबकि बीजद और कांग्रेस की रणनीति चौथी सीट पर मुकाबले को कड़ा बना रही है। अब सबकी नजरें विधायकों के रुख और अंतिम मतदान पर टिकी हैं।
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