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शैलाबाला महिला महाविद्यालय को विश्वविद्यालय दर्जा देने पर मंथन

  •    उच्च शिक्षा मंत्री बोले – पहले आधारभूत संरचना सुदृढ़ होगी

  •     फिर लिया जाएगा उचित निर्णय

भुवनेश्वर। शैलाबाला स्वायत्त महिला महाविद्यालय को विश्वविद्यालय का दर्जा देने की मांग को लेकर राज्य में एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने स्पष्ट किया है कि सरकार ने इस मांग को नजरअंदाज नहीं किया है, बल्कि गंभीरता से विचार कर रही है।

मंत्री ने कहा कि किसी संस्थान को विश्वविद्यालय में उन्नत करने से पहले उसकी आधारभूत संरचना, द्वितीय परिसर के विकास, भूमि आवंटन और आवश्यक शिक्षकीय व गैर-शिक्षकीय पदों की पूर्ति सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि किसी मौजूदा संस्थान को उन्नत करने में लगभग 50 से 70 करोड़ रुपये की आवश्यकता होती है, जबकि नए विश्वविद्यालय की स्थापना पर 300 से 350 करोड़ रुपये तक खर्च आता है, जिसमें आवर्ती व्यय भी शामिल है।

छात्रों का 28 दिन का धरना, देर रात समाप्त

शनिवार को छात्राओं ने विश्वविद्यालय दर्जे की मांग को लेकर दिनभर धरना-प्रदर्शन किया। इससे पहले वे सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन कर चुकी थीं। उनका सवाल है कि 113 वर्ष पुराने इस प्रतिष्ठित संस्थान को अब तक विश्वविद्यालय की मान्यता क्यों नहीं मिली। छात्राएं पिछले 28 दिनों से धरने पर बैठी थीं।

बारबाटी-कटक की विधायक सोफिया फिरदौस और भाजपा नेता श्रीतम दास ने धरनास्थल पहुंचकर छात्राओं से संवाद किया। चर्चा और आश्वासन के बाद देर रात छात्राओं ने अपना धरना वापस ले लिया।

एबीवीपी ने फिर उठाई आवाज

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बनाया है। परिषद की ओडिशा (पूर्व) प्रांत मंत्री दीप्तिमयी प्रतिहारी ने कहा कि राज्य का सबसे पुराना महिला महाविद्यालय अब तक विश्वविद्यालय दर्जा प्राप्त नहीं कर पाया है, जबकि यह संस्थान महिला शिक्षा और सशक्तिकरण में ऐतिहासिक भूमिका निभाता आया है।

कटक स्थित यह महाविद्यालय उत्कल गौरव मधुसूदन दास की सुपुत्री के नाम पर स्थापित है और वर्षों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहा है। एबीवीपी ने 2017 से आंदोलन शुरू किया था और 2019 में तत्कालीन राज्यपाल गणेशी लाल से मिलकर भी विश्वविद्यालय दर्जे की मांग की थी। परिषद ने यह भी चिंता जताई है कि सौंदर्यीकरण के नाम पर महाविद्यालय की भूमि अधिग्रहित की जा रही है, जबकि वैकल्पिक भूमि देने का वादा अब तक पूरा नहीं हुआ है।

सरकार का आश्वासन

मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों ने छात्राओं से बातचीत की है और आगे भी संवाद जारी रहेगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य विधानसभा में भी इस विषय पर चर्चा हो चुकी है और उचित समय पर समुचित निर्णय लिया जाएगा। शैलाबाला महाविद्यालय को विश्वविद्यालय का दर्जा देने का मुद्दा अब शिक्षा और विकास की व्यापक बहस का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में सरकार का निर्णय इस ऐतिहासिक संस्थान की दिशा और दशा तय करेगा।

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