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दलहन आत्मनिर्भरता मिशन पर राष्ट्रीय कार्यशाला
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उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंहदेव ने गिनाई ओडिशा की पहल
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बोले-किसानों और भूमि स्वास्थ्य के हित में धान से दलहन की ओर बढ़े
भुवनेश्वर। दलहन आत्मनिर्भरता मिशन पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में ओडिशा के कृषि सुधारों की देशभर में सराहना हुई। इस मंच पर उपमुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री कनक वर्धन सिंहदेव ने राज्य की नीतिगत पहलों को सामने रखते हुए बताया कि किस तरह ओडिशा किसानों की आय बढ़ाने और भूमि स्वास्थ्य सुधारने के उद्देश्य से धान आधारित खेती से दलहन की ओर संतुलित बदलाव कर रहा है। उनके संबोधन ने ओडिशा को कृषि सुधारों के एक प्रभावी मॉडल के रूप में स्थापित किया।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत दलहन फसलों पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के अमलाहा में किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की। इस अवसर पर ओडिशा के उपमुख्यमंत्री एवं कृषि व किसान सशक्तिकरण मंत्री कनक वर्धन सिंहदेव ने भाग लिया और राज्य के कृषि परिदृश्य तथा सुधारात्मक प्रयासों को प्रमुखता से रखा।
दलहन आत्मनिर्भरता देश और किसान दोनों के लिए जरूरी
कार्यशाला को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनाने और किसानों के कल्याण के लिए दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की शुरुआत की गई है। उन्होंने कहा कि विदेशों से दलहन आयात करना गर्व का नहीं, बल्कि चिंता का विषय है। यह मिशन केवल दलहन उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को सशक्त बनाने का एक व्यापक अभियान है।
ओडिशा में कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव: सिंहदेव
उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंहदेव ने कहा कि ओडिशा में कृषि क्षेत्र में निरंतर सुधार और परिवर्तन देखने को मिल रहा है। रणनीतिक नीतिगत फैसलों, आधुनिक तकनीकों के उपयोग और जलवायु-सहिष्णु कृषि पद्धतियों के कारण राज्य की कृषि को नई दिशा मिली है। उन्होंने कहा कि ओडिशा सरकार किसानों को धान की खेती के लिए इनपुट सहायता प्रदान कर रही है और साथ ही आत्मनिर्भरता के लक्ष्य के तहत धान से दलहन की ओर बदलाव को प्रोत्साहित कर रही है।
धान परती भूमि में दलहन-तिलहन की खेती पर जोर
सिंहदेव ने बताया कि राज्य सरकार की प्रमुख योजना कम्प्रिहेन्सिव प्रोजेक्ट ऑन राइस फेलो मैनेजमेंट के तहत रबी मौसम में परती पड़ी धान की जमीन को अल्प अवधि की दलहन और तिलहन फसलों के लिए उपयोग में लाया जा रहा है। यह योजना ओडिशा सरकार की एक प्रमुख पहल है। उन्होंने जानकारी दी कि रबी 2025-26 के दौरान राज्य के सभी जिलों में 3.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में प्रदर्शन कार्यक्रम प्रस्तावित किए गए हैं।
पूर्वोदय राज्यों में कृषि का विकास केंद्र बनेगा ओडिशा
उपमुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इन सभी प्रगतिशील कदमों के चलते ओडिशा, पूर्वोदय राज्यों के बीच कृषि विकास का केंद्र बनकर उभरेगा।
कई राज्यों के कृषि मंत्रियों ने लिया हिस्सा
इस राष्ट्रीय कार्यशाला में विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ-साथ ओडिशा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. प्रवात कुमार राउल, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और अंतरराष्ट्रीय शुष्क क्षेत्र कृषि अनुसंधान केंद्र के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
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