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पूर्व राज्यपाल रघुबर दास के बेटे पर मारपीट के आरोप थे फर्जी

  • गृह विभाग के अधिकारी एएसओ बैकुंठ प्रधान पर झूठ, धमकी और राजनीतिक साजिश के गंभीर आरोप

  • ऑल ओडिशा वेटरन सोल्जर्स एसोसिएशन ने की सख्त कार्रवाई की मांग

  • कहा- पुरी राजभवन से जुड़ा यह पूरा मामला एक मनगढ़ंत कहानी और सुनियोजित राजनीतिक षड्यंत्र

भुवनेश्वर। ओडिशा के पूर्व राज्यपाल रघुबर दास के बेटे से जुड़े पुरी राजभवन कथित मारपीट मामले में एक बड़ा और सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। ऑल ओडिशा वेटरन्स सोल्जर्स एसोसिएशन (एओवीएसए) ने गृह विभाग, ओडिशा सरकार में तैनात अधिकारी एएसओ बैकुंठ प्रधान पर झूठे आरोप गढ़ने, सरकारी पद के दुरुपयोग और राजनीतिक साजिश रचने के गंभीर आरोप लगाए हैं और राज्य सरकार से उनके विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। संगठन का कहना है कि इतने उच्च स्तर पर मामला उठने के बावजूद संबंधित एएसओ द्वारा अब तक किसी भी प्रकार का ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।

एसोसिएशन के अनुसार, बैकुंठ प्रधान ने स्वयं यह दावा किया था कि घटना के समय के वीडियो प्रमाण उनके पास मौजूद हैं और वे उचित समय पर यह प्रमाण न्यायपालिका और संगठन को सौंपेंगे। लेकिन बाद में बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद उन्होंने किसी भी प्रकार का प्रमाण किसी को भी उपलब्ध नहीं कराया। एओवीएसए का आरोप है कि बैकुंठ प्रधान ने जुलाई 2024 में पुरी राजभवन में पूर्व राज्यपाल के पुत्र से जुड़े कथित हमले को लेकर संगठन और प्रशासन को लगातार गुमराह किया। बार-बार आश्वासन देने के बावजूद उन्होंने न तो एफआईआर की प्रति, न मेडिकल रिपोर्ट और न ही कोई अन्य प्रमाण उपलब्ध कराया, जिससे पूरे मामले की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।

पूर्व सैनिक संगठन का आरोप—सबूत मांगने पर एएसओ ने डराया

संगठन का कहना है कि जब ऑल ओडिशा वेटरन सोल्जर्स एसोसिएशन ने इस संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया, तो बैकुंठ प्रधान ने संगठन के खिलाफ रुख अपनाते हुए पदाधिकारियों को कोर्ट नोटिस भेजे और झूठे मामलों में फंसाने का प्रयास किया। आरोप है कि अपनी गलतियों को छिपाने के उद्देश्य से उन्होंने संगठन को कमजोर करने और तोड़ने की भी कोशिश की। इससे पूर्व सैनिक संगठन में असंतोष और भय का माहौल पैदा हुआ।

पूरा मामला व्यक्तिगत स्वार्थ से प्रेरित

ऑल ओडिशा वेटरन सोल्जर्स एसोसिएशन की आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरा मामला व्यक्तिगत स्वार्थ से प्रेरित प्रतीत होता है। पुरी राजभवन घटना के बाद बैकुंठ प्रधान का सरकारी आवास राजनीतिक नेताओं के आवागमन का केंद्र बन गया था। जब राष्ट्रीय मीडिया ने उनका पक्ष जानने की कोशिश की, तो उन्होंने स्वयं सामने आने के बजाय अपने परिवार के सदस्यों को मीडिया के सामने भेजा। अब तक उन्होंने किसी भी मीडिया मंच पर स्वयं अपना बयान नहीं दिया है।

घटना के बाद बैकुंठ प्रधान ने सचिवालय सेवा संघ से सहायता ली 

संगठन का यह भी कहना है कि घटना के बाद बैकुंठ प्रधान ने सचिवालय सेवा संघ से सहायता ली थी, लेकिन बाद में उन्होंने उस संघ के साथ भी सहयोग नहीं किया। इसके साथ ही वे संगठन से दूरी बनाए रखते हुए लगातार राजनीतिक व्यक्तियों के संपर्क में रहे। इससे यह संदेह और गहरा होता है कि पुरी राजभवन से जुड़ा यह पूरा मामला एक मनगढ़ंत कहानी और सुनियोजित राजनीतिक षड्यंत्र हो सकता है। संगठन का दावा है कि इसी विवाद के चलते उस समय ओडिशा विधानसभा की कार्यवाही सात दिनों तक स्थगित करनी पड़ी, जिससे न केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया बाधित हुई बल्कि राज्य के राजकोष को भी नुकसान हुआ और प्रशासन की साख पर भी असर पड़ा।

गृह विभाग में रहते हुए पूर्व सैनिक संगठन को कमजोर करने का आरोप

एओवीएसए का कहना है कि वर्तमान में भी बैकुंठ प्रधान गृह विभाग में अपने पद का दुरुपयोग कर पूर्व सैनिक समुदाय और संगठन को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं, विशेषकर तब जब उनसे राजभवन कांड से जुड़े सबूत मांगे जाते हैं। संगठन का आरोप है कि इससे न केवल पूर्व सैनिकों की एकता प्रभावित हो रही है बल्कि सरकारी व्यवस्था की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग

ऑल ओडिशा वेटरन्स सोल्जर्स एसोसिएशन ने राज्य सरकार को पत्र लिख कर मांग की है कि सरकारी पद के दुरुपयोग, झूठे आरोप, धमकी, राजनीतिक गतिविधियों में संलिप्तता और प्रशासनिक अस्थिरता फैलाने जैसे गंभीर आरोपों की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि सरकार और पूर्व सैनिकों की गरिमा बनी रह सके।

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