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“शब्दों में अमर हुआ अटल जी के साथ मंच साझा करने वाला शायर”

  •  अनुज हिंदी पुस्तकालय में वरिष्ठ शायर-व्यंग्यकार गोपाल कृष्ण सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि

भुवनेश्वर। शब्दों से समाज को आईना दिखाने वाले, शायरी और व्यंग्य के जरिए संवेदनाओं को स्वर देने वाले वरिष्ठ साहित्यकार स्वर्गीय गोपाल कृष्ण सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनके शब्द उन्हें अमर बना गए हैं। अटल बिहारी वाजपेयी जैसे महान कवि और राष्ट्रनेता के साथ मंच साझा कर काव्य पाठ करने वाले गोपाल कृष्ण सिंह की स्मृति में 1 फरवरी 2026, रविवार को भुवनेश्वर स्थित अनुज हिंदी पुस्तकालय में एक भावनात्मक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत मौन और प्रार्थना के साथ हुई। इस अवसर पर स्वर्गीय गोपाल कृष्ण सिंह की पत्नी, पुत्र एवं परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। सभा में मौजूद साहित्यप्रेमियों की आंखें नम थीं और शब्दों में शोक, सम्मान और कृतज्ञता साफ झलक रही थी।
अटल जी के सान्निध्य में काव्य पाठ, साहित्यिक पहचान का शिखर
श्रद्धांजलि सभा की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि स्वर्गीय गोपाल कृष्ण सिंह ने अपने साहित्यिक जीवन में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के साथ मंच साझा किया था। यह क्षण उनके साहित्यिक जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है। वे केवल शायर ही नहीं, बल्कि एक सशक्त व्यंग्यकार भी थे, जिनकी रचनाओं में सामाजिक विडंबनाओं पर तीखा लेकिन संवेदनशील प्रहार देखने को मिलता था।
कविताओं के माध्यम से जीवित रही स्मृतियाँ
अनुज हिंदी पुस्तकालय की ओर से किशन खण्डेलवाल सहित अशोक पाण्डेय, सजन लढानिया, सीए अनूप अग्रवाल, दिनेश गुप्ता, रश्मि गुप्ता, विक्रमादित्य सिंह, आशीष विद्यार्थी, विनोद कुमार, मनीष पांडेय, आर. के. दुबे, अविनाश कुमार एवं अन्य साहित्यकारों ने अपनी-अपनी कविताओं और स्मृतियों के माध्यम से स्वर्गीय गोपाल कृष्ण सिंह को श्रद्धांजलि दी। हर कविता में उनका व्यक्तित्व, उनका व्यंग्य और उनकी संवेदना जीवित नजर आई।
हिंदी साहित्य के लिए अपूरणीय क्षति
वक्ताओं ने कहा कि गोपाल कृष्ण सिंह का निधन हिंदी साहित्य, विशेषकर शायरी और व्यंग्य के क्षेत्र में एक अपूरणीय क्षति है। उनका लेखन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। कार्यक्रम के अंत में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।
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