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मानव जीवन के लिए एक सम्पूर्ण मार्गदर्शन प्रस्तुत करते हैं उपनिषद

  • रासेश्वरी देवी का ‘उपनिषद ज्ञानामृत’ विषय पर प्रवचन का शुभारंभ

  • कहा-उपनिषद किसी एक धर्म या संप्रदाय तक सीमित नहीं

भुवनेश्वर। सनातन धर्म में वेदों को सर्वोच्च ज्ञान का स्रोत माना गया है, जबकि उपनिषदों को वैदिक ज्ञान का शिखर एवं सार कहा जाता है। इसी शाश्वत ज्ञान की समकालीन प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज की प्रमुख प्रचारिका रासेश्वरी देवी ने भुवनेश्वर में ‘उपनिषद ज्ञानामृत’ शीर्षक से एक विशेष प्रवचन श्रृंखला का शुभारंभ किया।

उद्घाटन सत्र में रासेश्वरी देवी ने ‘उपनिषद माहात्म्य’ विषय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि उपनिषद चारों वेदों के सारतत्त्व को समेटे हुए मानव जीवन के लिए एक सम्पूर्ण मार्गदर्शन प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उपनिषद किसी एक धर्म या संप्रदाय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आत्मा, संसार और परमात्मा से जुड़े सार्वभौमिक सत्य को प्रकट करने वाले शाश्वत ग्रंथ हैं।

अपने प्रवचन के दौरान रासेश्वरी देवी ने श्वेताश्वतर उपनिषद (1.12) के मंत्र का उद्धरण देते हुए उसके गूढ़ अर्थ की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि जीवात्मा अनादिकाल से जन्म-मृत्यु के चक्र में बंधी हुई है और भौतिक सुखों की खोज में रहते हुए भी सच्चे आनंद को प्राप्त नहीं कर पाती। त्रिगुण, त्रिकर्म, पंचकोश और पंचक्लेश जैसे भौतिक बंधन मानव को दुःख में आबद्ध रखते हैं, जिनसे मुक्ति का मार्ग केवल उपनिषदों के दिव्य ज्ञान से ही संभव है।

मानव जीवन की विशिष्टता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि पशुओं में विवेक का अभाव होता है और देवताओं के पास कर्म की स्वतंत्रता नहीं होती, जबकि मनुष्य को विवेक शक्ति और कर्म-स्वतंत्रता—दोनों का दुर्लभ संयोग प्राप्त है। यही विशेषता मनुष्य को ईश्वर-प्राप्ति का अधिकारी बनाती है।

उन्होंने कहा कि यह भी रेखांकित किया कि उपनिषद केवल दार्शनिक विमर्श नहीं हैं, बल्कि वे दैनिक जीवन में नैतिकता, संयम और आध्यात्मिक संतुलन स्थापित करने का व्यावहारिक मार्ग प्रदान करते हैं। आज के तेज़ रफ्तार और तनावपूर्ण जीवन में उपनिषद मानव को स्पष्ट दिशा और आंतरिक शांति प्रदान करते हैं।

उन्होंने बताया कि इस प्रवचन श्रृंखला का उद्देश्य उपनिषदों के गहन तत्वज्ञान को सरल और सहज भाषा में समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाना है, ताकि लोग अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और आध्यात्मिक प्रकाश का अनुभव कर सकें।

उद्घाटन समारोह में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल, शहरी विकास मंत्री डा कृष्णचंद्र महापात्र, भाजपा नेता जगन्नाथ प्रधान व सुजीत दास उपस्थित थे।

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