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15 नगर परिषद अध्यक्षों से मिले बीजद प्रमुख

  • सरकारी निर्देशों से चुने हुए प्रतिनिधियों के अधिकार सीमित होने का आरोप

  •  नवीन पटनायक ने निर्देशों को बताया अलोकतांत्रिक

भुवनेश्वर। ओडिशा की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया, जब राज्य की विभिन्न नगर परिषदों के 15 अध्यक्षों ने पूर्व मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल (बीजद) अध्यक्ष नवीन पटनायक से पार्टी कार्यालय में मुलाकात की। यह प्रतिनिधिमंडल ओडिशा स्टेट म्युनिसिपल काउंसिल फेडरेशन के बैनर तले पूर्व मंत्री प्रताप जेना के नेतृत्व में पहुंचा।

बैठक के दौरान नगर परिषद अध्यक्षों ने राज्य सरकार द्वारा हाल ही में जारी प्रशासनिक निर्देशों पर कड़ा विरोध जताया। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि शहरी विकास विभाग के नए दिशा-निर्देशों ने चुने हुए जनप्रतिनिधियों की शक्तियों को काफी हद तक सीमित कर दिया है, जिससे विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं को जमीन पर उतारना मुश्किल हो गया है।

कार्यकारी अधिकारियों को अधिक अधिकार

अध्यक्षों ने आरोप लगाया कि नए प्रावधानों के तहत कार्यकारी अधिकारियों को अत्यधिक वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार दिए गए हैं, जबकि लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रतिनिधियों की भूमिका कमजोर की जा रही है। उनका कहना है कि इससे स्थानीय जनता की अपेक्षाओं को पूरा करना कठिन हो गया है और यह बदलाव राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से किया गया प्रतीत होता है।

नवीन पटनायक का सरकार पर हमला

ओडिशा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे नवीन पटनायक ने सरकार के इस कदम की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक आदेशों के जरिए नगर निकायों के चुने हुए प्रतिनिधियों के अधिकारों में कटौती करना लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास है।

हालांकि, प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने नगर परिषद अध्यक्षों से जनता से जुड़े रहने और जनसेवा का कार्य निरंतर जारी रखने का आह्वान किया।

5 जनवरी 2026 के पत्र से उपजा विवाद

यह पूरा विवाद सरकार के 5 जनवरी 2026 को जारी एक पत्र से जुड़ा है। इसमें कार्यकारी अधिकारियों की वित्तीय शक्ति बढ़ाकर 3 लाख रुपये तक करने, बिना प्रतिस्पर्धी निविदा के खरीद की अनुमति देने और 10 लाख रुपये तक के चेक बिना काउंटर साइन के जारी करने जैसे प्रावधान शामिल हैं।

नगर परिषद अध्यक्षों का कहना है कि इससे निर्णय प्रक्रिया का केंद्रीकरण हो रहा है और नगर निकायों की स्वायत्तता समाप्त हो रही है, जिससे स्थानीय स्तर पर असंतोष बढ़ रहा है।

शहरी शासन को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष में टकराव

यह मुलाकात शहरी स्थानीय निकायों के प्रशासनिक सुधारों को लेकर सत्तारूढ़ सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाती है। जैसे-जैसे ओडिशा के शहरी क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहे हैं, ऐसे विवाद जमीनी स्तर के विकास और आने वाले चुनावी समीकरणों पर भी असर डाल सकते हैं।

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