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ब्रह्मपुर व्यवसायी हत्याकांड में पांच दोषियों को उम्रकैद

  •     14 जून 2020 को हुई थी घटना, कार्यालय में मिला था शव

ब्रह्मपुर। ब्रह्मपुर के चर्चित व्यवसायी लम्बोधर मुनि हत्याकांड में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पांच आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला वर्ष 2020 में हुई नृशंस हत्या, लूट और सबूत मिटाने से जुड़ा था, जिसकी जांच अंततः ओडिशा पुलिस की सीआईडी क्राइम ब्रांच ने पूरी की।

अदालत ने प्रत्येक दोषी को आजीवन कारावास एवं 5,000 रुपये जुर्माना तथा जुर्माना न देने पर 4 माह का अतिरिक्त कठोर कारावास। 10 वर्ष का कठोर कारावास एवं 5,000 रुपये जुर्माना तथा धारा 201 आईपीसी के तहत 5 वर्ष का कठोर कारावास एवं 3,000 रुपये जुर्माना (डिफॉल्ट में 2 माह का कारावास) की सजा सुनाई।

ये हैं दोषी करार दिए गए आरोपी

–    रूपेश कुमार पाढ़ी उर्फ लाला उर्फ राजेश (27) – नेहरू नगर, ब्रह्मपुर

–    श्रीनु पात्र (20) – मूल निवासी कंधमाल, वर्तमान पता ब्रह्मपुर

–    शिव महाकुड़ (27) – नेहरू नगर, ब्रह्मपुर

–    रंजीत साहू उर्फ नाका (26) – दिग्गपहांडी, वर्तमान पता ब्रह्मपुर

–    शंकर साहू (24) – नेहरू नगर, ब्रह्मपुर

जांच और अभियोजन की अहम भूमिका

इस मामले की सीआईडी क्राइम ब्रांच जांच का नेतृत्व डीएसपी आशुतोष मिश्र ने किया, जबकि प्रारंभिक जांच तत्कालीन आईआईसी सुमीत सोरेन (गोसायां नुआगांव थाना) द्वारा की गई थी। अभियोजन की जिम्मेदारी पहले बिक्रम कुंड, बाद में विश्वजीत बराल ने निभाई, जिन्हें सीआईडी सीबी के देबाशीष महाकुड़ का मार्गदर्शन मिला।

मुनि का शव खून से लथपथ अवस्था में मिला

घटना 14 जून 2020 की है, जब लम्बोधर मुनि के कर्मचारी वी. विनय ने गोसायां नुआगांव थाना क्षेत्र अंतर्गत महालक्ष्मी भंडार स्थित कार्यालय परिसर में मुनि का शव खून से लथपथ अवस्था में देखा।

जांच में सामने आया कि आरोपियों ने मुनि की हत्या करने के बाद करीब 10 लाख रुपये नकद और 20-25 ग्राम सोने के आभूषण लूट लिये थे।

मामले की धाराओं में हुआ बदलाव

शुरुआत में यह मामला ब्रह्मपुर जिला थाना कांड संख्या 87/2020 के तहत आईपीसी की धारा 458/394/302 में दर्ज किया गया था। बाद में डकैती और सबूत नष्ट करने के पहलुओं को जोड़ते हुए धाराओं को बदलकर 460/396/201 आईपीसी किया गया।

हाईकोर्ट के निर्देश पर सीआईडी क्राइम ब्रांच को सौंपी गई जांच

जिला पुलिस द्वारा की जा रही जांच पर सवाल उठने के बाद मृतक के पुत्र ने ओडिशा हाईकोर्ट का रुख किया। मामले पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मामले की जांच सीआईडी क्राइम ब्रांच को सौंपने का निर्देश दिया। इसके बाद सीआईडी सीबी ने 1 दिसंबर 2023 को इसे कांड संख्या 16 के रूप में पुनः दर्ज कर गहन जांच शुरू की।

सीसीटीवी, कॉल रिकॉर्ड और फोरेंसिक जांच से मजबूत हुआ केस

जांच के दौरान आरोपियों से लूटे गए सोने के आभूषण, नकदी और अन्य सामान बरामद किए गए, जिन्हें पहचान परेड में मृतक के परिजनों ने पहचाना। सीसीटीवी फुटेज की जांच के लिए डीवीआर को देश की तीन फोरेंसिक लैब में जांचा गया, इसके बाद उसे नीदरलैंड्स स्थित मूल निर्माता कंपनी को भेजा गया, जहां से अहम तकनीकी साक्ष्य प्राप्त हुए। इसके अलावा आरोपियों के मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) ने भी उनकी संलिप्तता की पुष्टि की। अभियोजन पक्ष ने अदालत में 41 गवाहों को पेश किया।

28 जनवरी 2026 को सुनाया गया फैसला

तृतीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, ब्रह्मपुर की अदालत में सुनवाई के बाद 28 जनवरी 2026 को न्यायाधीश बी. गौतम ने पांचों आरोपियों को दोषी ठहराया।

न्याय व्यवस्था पर मजबूत विश्वास

यह फैसला न केवल मृतक परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि लंबे समय बाद भी कानून अपना रास्ता बनाकर दोषियों तक पहुंचता है।

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