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पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास को संतुलित रूप से आगे बढ़ाने पर जोर
भुवनेश्वर। राज्य के विकास को स्थायी, सुदृढ़ और निरंतर आधार पर आगे बढ़ाने के उद्देश्य से नीली और हरित अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों के प्रभावी उपयोग पर केंद्रित दो दिवसीय कार्यशाला गुरुवार से शुरू हुई। राज्य योजना एवं समन्वय विभाग के सतत विकास लक्ष्य सेल के तत्वावधान में स्थानीय क्राउन होटल के सम्मेलन कक्ष में आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन राज्य विकास आयुक्त सह अतिरिक्त मुख्य सचिव देव रंजन कुमार सिंह ने किया।
इस अवसर पर सिंह ने कहा कि नीली और हरित अर्थव्यवस्था से जुड़े सभी हितधारकों को इन क्षेत्रों की संभावनाओं को समझते हुए ऐसे प्रयास करने चाहिए, जिससे आम जनता इन अवसरों का लाभ उठा सके और राज्य की आर्थिक प्रगति को गति मिले। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास को संतुलित रूप से आगे बढ़ाने पर जोर देते हुए आशा व्यक्त की कि यह कार्यशाला उपयोगी साबित होगी।
कार्यशाला में योजना एवं समन्वय विभाग के विशेष सचिव टी आओ ने स्वागत भाषण देते हुए इसके उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ओडिशा के वन, प्राकृतिक संसाधन, नदियां और लंबा समुद्री तट नीली और हरित अर्थव्यवस्था के लिए व्यापक संभावनाएं प्रदान करते हैं। मत्स्य पालन, जलीय कृषि, समुद्री व्यापार, समुद्र आधारित नवीकरणीय ऊर्जा, जैव प्रौद्योगिकी तथा पर्यावरण और मैंग्रोव संरक्षण जैसे क्षेत्रों में विकास की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं।
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम भारत के ऊर्जा एवं सहनशीलता स्तंभ के पर्यावरण प्रमुख डॉ आशीष चतुर्वेदी ने भी कार्यशाला में भाग लेते हुए सतत विकास लक्ष्यों के प्रति संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। उन्होंने सामाजिक समावेशन, खाद्य सुरक्षा, कौशल विकास, रोजगार सृजन और निवेश की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।
इस अवसर पर ओडिशा में सतत विकास लक्ष्यों से जुड़े कार्यक्रमों और पहलों पर आधारित एक वृत्तचित्र प्रदर्शित किया गया। साथ ही राज्य में संचालित आकांक्षी जिलों और आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम की सफलता की कहानियों के दूसरे भाग का विमोचन किया गया। दो दिनों तक चलने वाली इस कार्यशाला में छह तकनीकी सत्र आयोजित होंगे, जिनमें नीली और हरित अर्थव्यवस्था के विशेषज्ञ विषय आधारित चर्चा कर सुझाव देंगे।
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