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सरकारी व्यावसायिक उच्च माध्यमिक विद्यालयों के प्राचार्यों के लिए राज्यस्तरीय कार्यशाला
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एकदिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला में राज्यभर से 230 विद्यालयों के प्राचार्यों ने लिया भाग
भुवनेश्वर। राज्य में व्यावसायिक शिक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से बुधवार को सरकारी व्यावसायिक उच्च माध्यमिक विद्यालयों (जीवीएचएसएस) के प्राचार्यों के लिए राज्यस्तरीय एकदिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में ओडिशा के सभी 230 सरकारी व्यावसायिक उच्च माध्यमिक विद्यालयों के प्राचार्यों ने भाग लिया।
कार्यशाला में डीएचएसई की निदेशक स्मिता नियति पटनायक, संयुक्त निदेशक विनिता सेनापति, क्षेत्रीय निदेशक (भुवनेश्वर) सुष्मिता साहू, संयुक्त निदेशक सस्मिता माली, उप निदेशक जितेंद्र नायक और राजधानी कॉलेज के प्राचार्य डॉ सरोजकांत चौधरी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
इसके अलावा क्षेत्रीय निदेशक (संबलपुर) पवित्र मोहन साहू, क्षेत्रीय निदेशक (ब्रह्मपुर) जगन्नाथ धरुआ, संयुक्त निदेशक स्निग्धा मिश्रा और उप निदेशक सीए. विजयलक्ष्मी भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
नई शिक्षा नीति में व्यावसायिक शिक्षा पर विशेष जोर
कार्यशाला को संबोधित करते हुए निदेशक नियति पटनायक ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में व्यावसायिक शिक्षा को विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला व्यावसायिक संस्थानों के प्राचार्यों को सशक्त बनाने के साथ-साथ उनके बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में सहायक होगी।
उन्होंने यह भी बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य व्यावसायिक शिक्षा के प्रभावी क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों की पहचान कर व्यावहारिक समाधान तलाशना है।
छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने में व्यावसायिक शिक्षा की अहम भूमिका
संयुक्त निदेशक बिनिता सेनापति ने अपने संबोधन में कहा कि व्यावसायिक शिक्षा छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उन्होंने प्राचार्यों से आग्रह किया कि वे छात्रों की व्यक्तिगत रुचियों और क्षमताओं के अनुसार उन्हें उपयुक्त व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की ओर मार्गदर्शन करें।
विकसित भारत के लक्ष्य में व्यावसायिक शिक्षा की भूमिका
कार्यक्रम में डॉ सरोजकांत चौधरी ने कहा कि व्यावसायिक शिक्षा को छात्रों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए संस्थानों को मजबूत बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक शिक्षा को प्राथमिकता देकर और छात्रों को स्वावलंबी बनाकर ही ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
शैक्षणिक और प्रशासनिक विषयों पर हुआ मंथन
कार्यशाला के दौरान व्यावसायिक शिक्षा का महत्व, परीक्षा प्रबंधन, शैक्षणिक प्रशासन, एसएएमएस पोर्टल का प्रबंधन और करियर मार्गदर्शन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम का संचालन संयुक्त निदेशक सस्मिता माली ने किया, जबकि उप निदेशक जितेंद्र नायक ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
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