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किसान संगठन के आह्वान पर सियासत तेज
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बंद को कांग्रेस और बीजद का समर्थन, भाजपा ने किया विरोध
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धान खरीद, पीयूसीसी जुर्माना और बिजली दरों को लेकर होगा विरोध प्रदर्शन
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भाजपा ने बताया ‘फर्जी किसान आंदोलन’
भुवनेश्वर। किसान संगठन नव निर्माण कृषक संगठन (एनएनकेएस) ने बुधवार, 28 जनवरी को सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक आठ घंटे के ओडिशा बंद का आह्वान किया है। यह बंद धान खरीद में कथित अनियमितताओं, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) प्रणाली के तहत लगाए जा रहे भारी जुर्मानों और बिजली दरों को लेकर कथित मनमानी के विरोध में बुलाया गया है।
एनएनकेएस का कहना है कि प्रशासनिक खामियों और बढ़ती लागत के कारण किसान और आम जनता गंभीर परेशानियों का सामना कर रही है। संगठन के राष्ट्रीय समन्वयक अक्षय कुमार ने कहा कि मंडियों में अनियमितताओं, पीयूसीसी प्रणाली और स्मार्ट मीटर लगाए जाने के विरोध में यह बंद किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बंद के दौरान आपातकालीन सेवाएं चालू रहेंगी।
सियासत तेज, आरोप-प्रत्यारोप शुरू
नव निर्माण कृषक संगठन द्वारा 28 जनवरी को बुलाए गए राज्यव्यापी ओडिशा बंद को कांग्रेस और बीजद का समर्थन मिलने के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।
कांग्रेस ने पहले किया समर्थन का ऐलान
सबसे पहले कांग्रेस ने बंद को समर्थन देने की घोषणा की। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने सभी जिला समितियों को निर्देश दिया कि वे बंद में सक्रिय भागीदारी करें और किसानों के मुद्दों को मजबूती से उठाएं।
बीजद ने बंद को बताया सकारात्मक कदम
इसके बाद बीजद के प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने बंद के फैसले का स्वागत करते हुए इसे एक सकारात्मक पहल बताया। उन्होंने कहा कि बीजद पहले से ही किसानों के मुद्दों, पीयूसी प्रमाणपत्र और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं से जुड़ी समस्याओं को उठाता रहा है। साथ ही उन्होंने किसान संगठन को बंद के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
युवा छात्र संगठन का भी समर्थन मिला
इस बंद को नव निर्माण युवा छात्र संगठन का भी समर्थन मिला है, जिसने भुवनेश्वर में रैलियों और जनसंपर्क अभियानों के जरिए लोगों को आंदोलन से जोड़ने का प्रयास किया।
भाजपा का पलटवार
किसान संगठन के बंद आह्वान पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखा हमला बोला है। भाजपा ने इसे “फर्जी किसान आंदोलन” करार देते हुए कहा कि एनएनकेएस को जमीनी स्तर पर कोई वास्तविक समर्थन प्राप्त नहीं है। भाजपा प्रवक्ता मनोज महापात्र ने आरोप लगाया कि कांग्रेस, जो खुद जनता को लामबंद करने में विफल रही है, ऐसे संगठनों के जरिए विरोध प्रदर्शन करवा रही है। उन्होंने दावा किया कि संगठन के नेताओं को कृषि की बुनियादी समझ भी नहीं है और वे धान व भूसी में अंतर तक नहीं कर सकते।
बीजद सरकार के दौरान किसान थे हतोत्साहित – मनोज
महापात्र ने कहा कि पिछली बीजद सरकार के दौरान किसान हतोत्साहित थे और बिचौलियों को फायदा हुआ, जबकि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के नेतृत्व में मौजूदा भाजपा सरकार किसानों को प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित बंद का राज्यभर में बहुत कम असर पड़ेगा, क्योंकि जनता इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित आंदोलन मान रही है।
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