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ओडिशा में स्वदेशी एआई इकोसिस्टम की दिशा में बड़ा कदम

  •     सर्वम एआई के साथ रणनीतिक साझेदारी पर मंथन

  •      ‘ओड़िया-प्रथम’ कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर जोर

भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने सुरक्षित, समावेशी और संप्रभु कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) इकोसिस्टम के निर्माण की दिशा में एक अहम पहल करते हुए भारतीय एआई कंपनी सर्वम एआई के साथ उच्चस्तरीय रणनीतिक चर्चा की। यह कंपनी भारतीय भाषाओं और सार्वजनिक क्षेत्र के उपयोग मामलों के लिए फाउंडेशनल मॉडल विकसित करने में अग्रणी मानी जाती है।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री, मुख्य सचिव, प्रधान सचिव (इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी), प्रधान सचिव (वित्त) सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। चर्चा का केंद्र एआई को ओडिशा विज़न 2036 और विज़न 2047 के अनुरूप दीर्घकालिक सार्वजनिक क्षमता के रूप में विकसित करना रहा।

राज्य-शासित साझा एआई अवसंरचना पर सहमति

बैठक में राज्य-शासित साझा एआई अवसंरचना के निर्माण पर विशेष जोर दिया गया। इसमें सुरक्षित कंप्यूट संसाधन और डेटा प्लेटफॉर्म शामिल होंगे, ताकि सार्वजनिक डेटा और एआई मॉडल पूरी तरह ओडिशा के नियंत्रण में रहें। इस मॉडल से विभिन्न विभागों में बिखरे निवेश को रोकते हुए स्केलेबिलिटी, सुरक्षा और स्थायित्व सुनिश्चित करने का लक्ष्य है।

ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के लिए ओड़िया-आधारित वॉयस एआई

राज्य सरकार ने ओड़िया भाषा में वॉयस-सक्षम एआई अनुप्रयोगों के विकास को प्राथमिकता दी, जिन्हें खासतौर पर ग्रामीण, जनजातीय और कम साक्षरता वाले समुदायों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा।

ये अनुप्रयोग शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य, ई-गवर्नेंस और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में उपयोगी होंगे, जिससे नागरिक सरल संवादात्मक माध्यमों से सरकारी योजनाओं, अधिकारों और शिकायत निवारण तक पहुंच बना सकेंगे।

एक वर्ष का समानांतर क्रियान्वयन ढांचा

परियोजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारने के लिए दोनों पक्षों ने एक वर्ष के समानांतर क्रियान्वयन ढांचे पर सहमति जताई। इसके तहत विभाग डेटा तैयार करेंगे और प्राथमिक उपयोग मामलों की पहचान करेंगे, वहीं दूसरी ओर मूल एआई अवसंरचना का निर्माण भी साथ-साथ होगा, ताकि सेवाओं की शुरुआत में देरी न हो।

दीर्घकालिक क्षमता निर्माण पर फोकस

बैठक में संस्थागत क्षमता निर्माण को भी प्रमुख विषय बनाया गया। योजनाओं में सरकारी अधिकारियों का प्रशिक्षण, अनुप्रयुक्त अनुसंधान को समर्थन और स्थानीय तकनीकी प्रतिभाओं को प्रोत्साहन शामिल है, ताकि राज्य अपने एआई सिस्टम को स्वतंत्र रूप से संचालित, अनुरक्षित और विकसित कर सके।

ब्लैक स्वान समिट में एमओयू की संभावना

इस रणनीतिक साझेदारी को औपचारिक रूप देने के लिए 5-6 फरवरी 2026 को होने वाले ब्लैक स्वान समिट में समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है।

अपनाने नहीं, दिशा देने वाला राज्य बने ओडिशा – मुख्यमंत्री

बैठक के बाद मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि ओडिशा को केवल तकनीक अपनाने वाला नहीं, बल्कि दूसरों के लिए तकनीकी मार्गदर्शक बनने वाला राज्य बनना चाहिए। कृत्रिम बुद्धिमत्ता हमें शासन और सार्वजनिक सेवा वितरण में नए मानक स्थापित करने का अवसर देती है।

एआई का लोकतंत्रीकरण जरूरी – मुख्य सचिव

मुख्य सचिव ने कहा कि यह समय है कि ओडिशा कृत्रिम बुद्धिमत्ता में अग्रणी राज्य के रूप में उभरे। एआई का वास्तविक लोकतंत्रीकरण तभी होगा जब इसके लाभ हर क्षेत्र और हर भौगोलिक हिस्से तक पहुंचें।

संप्रभु एआई पर ओडिशा की सोच सराहनीय – सर्वम एआई

सर्वम के सह-संस्थापक प्रत्युष कुमार ने कहा कि संप्रभु एआई और जन-स्तर पर प्रभाव पर ओडिशा का फोकस यह दर्शाता है कि राज्य शासन को मजबूत करने में एआई की भूमिका को गहराई से समझता है। हम इस दृष्टि को टिकाऊ सार्वजनिक प्रणालियों में बदलने के लिए राज्य के साथ काम करने को उत्सुक हैं।

राष्ट्रीय बेंचमार्क बनने की ओर ओडिशा

पारदर्शिता, अंतिम छोर तक सेवा पहुंच और स्वदेशी क्षमता पर केंद्रित ओडिशा का यह एआई रोडमैप राज्य को जिम्मेदार और नागरिक-केंद्रित कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक संभावित बेंचमार्क के रूप में स्थापित करता है।

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