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महानदी जल विवाद पर ओडिशा सरकार की अहम बैठक

  •     सर्वदलीय बैठक फिलहाल स्थगित

  •     बीजद के आक्रामक रुख के बीच सरकार ने की उच्चस्तरीय समीक्षा

  •     कानूनी व प्रशासनिक पहलुओं पर मंथन

भुवनेश्वर। महानदी नदी के जल बंटवारे को लेकर ओडिशा सरकार ने शुक्रवार को एक अहम उच्चस्तरीय बैठक की। हालांकि इस मुद्दे पर प्रस्तावित सर्वदलीय बैठक को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक को रद्द कर दिया गया है, हालांकि इसके पीछे कोई आधिकारिक कारण अब तक सामने नहीं आया है और अगली बैठक की तारीख की प्रतीक्षा की जा रही है।

सर्वदलीय बैठक के स्थगित होने के बावजूद सरकार ने महानदी जल विवाद को लेकर विस्तृत आंतरिक चर्चा की। इसी क्रम में भुवनेश्वर में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री केवी सिंहदेव ने की। बैठक में राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी, कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन और मुख्य सचिव अनु गर्ग सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में विवाद से जुड़े कानूनी, प्रशासनिक और न्यायाधिकरण से संबंधित पहलुओं की समीक्षा की गई।

बीजद के रुख के बाद बदला परिदृश्य

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सर्वदलीय बैठक का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के साथ होने वाली अंतरराज्यीय वार्ता से पहले ओडिशा का एकजुट राजनीतिक रुख तैयार करना था। इसमें राज्य सरकार की भविष्य की रणनीति पर सभी दलों से सुझाव लिए जाने थे। लेकिन यह बैठक ऐसे समय स्थगित की गई है, जब एक दिन पहले ही बीजू जनता दल की राजनीतिक मामलों की समिति ने महानदी मुद्दे पर राज्यव्यापी आंदोलन फिर से शुरू करने का फैसला किया।

बीजद ने तथाकथित “डबल इंजन सरकार” पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए कहा कि महानदी ओडिशा की जीवनरेखा है और इस पर कोई समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। पार्टी ने खास तौर पर छत्तीसगढ़ में बनाए गए ऊपरी बैराजों का मुद्दा उठाया, जिनके कारण गैर-मानसून महीनों में ओडिशा के निचले इलाकों में जल संकट गहराता है।

छत्तीसगढ़ दौरे से पहले बढ़ी सियासी हलचल

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब इसी महीने ओडिशा के प्रतिनिधिमंडल का छत्तीसगढ़ दौरा प्रस्तावित है। इस दौरे से पहले सर्वदलीय बैठक के जरिए सभी राजनीतिक दलों की राय लेकर साझा रणनीति बनाने की योजना थी। महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का कार्यकाल अप्रैल में समाप्त होने वाला है, जिससे इस मुद्दे की राजनीतिक और प्रशासनिक अहमियत और बढ़ गई है।

न्यायाधिकरण की भविष्य को लेकर चिंता

इस बीच, महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण ने भी ओडिशा और छत्तीसगढ़ सरकारों द्वारा निर्देशों का पालन न किए जाने पर गंभीर चिंता जताई है। न्यायाधिकरण ने दोनों राज्यों को जनवरी 2026 के पहले सप्ताह तक संयुक्त आवेदन देकर उसके कार्यकाल के विस्तार की मांग करने को कहा था। 20 दिसंबर 2025 की सुनवाई में यह निर्देश दिया गया था, क्योंकि न्यायाधिकरण का कार्यकाल 13 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है।

सूत्रों के अनुसार, कार्यकाल के शेष समय में केवल एक ही सुनवाई 7 फरवरी को निर्धारित है, जिससे न्यायाधिकरण की निरंतरता और विवाद के समाधान को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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