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ओडिशा में सार्वजनिक परिवहन से हटेंगी डीजल बसें

  •     ऐतिहासिक कदम के तहत आम बस का नया दौर होगा शुरू

  •     डीजल बसों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा

  •     पूरी तरह इलेक्ट्रिक होगी बस सेवा

  •     महिला चालक संभालेंगी कमान

भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को और सुरक्षित, पर्यावरण-अनुकूल तथा समावेशी बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य की प्रमुख शहरी परिवहन योजना ‘आम बस’ को पूरी तरह इलेक्ट्रिक बनाने के साथ-साथ इसमें महिला चालकों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जा रही है। डीजल बसों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा और भविष्य में केवल इलेक्ट्रिक बसें ही आम बस नेटवर्क में संचालित होंगी।

उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में लिये गए अहम फैसले

आवास एवं शहरी विकास मंत्री कृष्ण चंद्र महापात्र ने आम बस सेवा के संचालन और प्रदर्शन को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में सीआरयूटी के प्रबंध निदेशक संजय बिस्वाल, महाप्रबंधक सहदेव समाधिया और विशेष कार्य अधिकारी पल्लवी बेहरा सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में सेवा की संरचना, यात्री सुरक्षा, पर्यावरणीय प्रभाव और भविष्य की जरूरतों पर गहन चर्चा की गई।

डीजल बसें चरणबद्ध तरीके से होंगी स्क्रैप

मंत्री ने बताया कि आम बस सेवा के तहत चल रही सभी डीजल बसों को चरणबद्ध तरीके से स्क्रैप किया जाएगा। उनकी जगह नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल की जाएंगी, ताकि आने वाले वर्षों में आम बस नेटवर्क पूरी तरह इलेक्ट्रिक हो सके। यह फैसला राज्य सरकार की सतत शहरी परिवहन नीति और कार्बन उत्सर्जन घटाने की प्रतिबद्धता के अनुरूप है। हाल ही में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी द्वारा इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाया जाना इसी दिशा में एक मजबूत संकेत है।

600 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल करने की तैयारी

वर्तमान में आम बस सेवा के तहत 113 मार्गों पर 1,399 किलोमीटर क्षेत्र में 220 से अधिक इलेक्ट्रिक बसें संचालित हो रही हैं। सरकार का लक्ष्य इस बेड़े में सैकड़ों नई बसें जोड़ने का है। पीएम ई-बस सेवा और पीएम ई-ड्राइव योजनाओं के तहत लगभग 600 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल करने की तैयारी चल रही है।

महिला चालकों को पुणे में मिलेगा विशेष प्रशिक्षण

महिलाओं की सुरक्षा और समावेशी रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आम बस सेवा में महिला चालकों को शामिल किया जा रहा है। मंत्री ने बताया कि सीआरयूटी की 20 चयनित महिला अभ्यर्थियों को 31 जनवरी को पुणे भेजा जाएगा, जहां उन्हें इलेक्ट्रिक बस संचालन का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

महिला स्पेशल बस चलाने की भी योजना

सरकार 5 से 10 पूरी तरह महिला-विशेष आम बसें चलाने पर भी विचार कर रही है। मुख्यमंत्री की स्वीकृति मिलने के बाद इस प्रस्ताव को लागू किया जाएगा।

बस चालकों के लिए शराब जांच अनिवार्य

सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में शराब सेवन को बताते हुए मंत्री ने कहा कि आम बस चालकों के लिए शराब जांच अनिवार्य कर दी गई है। पिछले एक वर्ष में यात्रा की शुरुआत, समाप्ति और संचालन के दौरान औचक निरीक्षण के जरिए 1.97 लाख शराब जांच की गईं।

19 चालक दोषी पाए गए

इन जांचों में 19 चालक शराब सेवन करते हुए पकड़े गए। उन्हें गिरफ्तार किया गया और कानून के अनुसार तीन महीने के लिए उनके ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित कर दिए गए। निलंबित लाइसेंस संबंधित क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों को भेजे गए हैं।

ड्राइवर प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना

सीआरयूटी डिपो परिसर में जल्द ही एक समर्पित चालक प्रशिक्षण संस्थान स्थापित किया जाएगा। यहां व्यावहारिक ड्राइविंग कौशल, यातायात नियम, लेन अनुशासन, सड़क सुरक्षा और व्यवहारिक प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

दुर्घटना पीड़ित परिवारों को राहत

मंत्री ने बताया कि सीआरयूटी की ओर से सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले यात्रियों के परिवारों को तत्काल अनुकंपा सहायता दी गई है। अब तक 4 करोड़ रुपये से अधिक की बीमा राशि पीड़ित परिवारों को प्रदान की जा चुकी है।

नए शहरों तक आम बस का विस्तार

सरकार आम बस सेवा का विस्तार बारिपदा, केंदुझर और अनुगूल जैसे शहरों तक तेजी से कर रही है। इसके साथ ही हाल की बस आग की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए पुरानी बसों को हटाकर छोटे आकार की इलेक्ट्रिक बसें लाने की योजना है, ताकि अंतिम छोर तक बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित हो सके।

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