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भारतीय भाषा पारिभाषिक शब्दावली पर राष्ट्रीय कार्यशाला

  •     संस्कृत-ओड़िया-हिंदी के लिए एकरूप पारिभाषिक शब्दावली का निर्माण अत्यंत आवश्यक

कोरापुट। ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग तथा भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन भारतीय भाषा समिति, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में सुनाबेड़ा परिसर में “भारतीय भाषाओं के लिए समान वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली (ओड़िया, हिंदी एवं संस्कृत के संदर्भ में)” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला 19-20 जनवरी 2025 को सफलतापूर्वक आयोजित की गई। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य भारतीय भाषाओं में वैज्ञानिक-प्रौद्योगिक शब्दावली के लिए एक सामान्य और मानक ढांचा विकसित करना था।

19 जनवरी को दीप प्रज्वलन एवं वेद-मंत्रोच्चार के साथ कार्यक्रम का उद्घाटन हुआ। विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो नरसिंह चरण पंडा की अध्यक्षता में आयोजित उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में प्रो सत्यनारायण पंडा उपस्थित रहे। सम्मानित अतिथियों में निरंजन सामल, कार्यपालक निदेशक, नालको, दामनजोड़ी, एस बसु, महाप्रबंधक (मानव संसाधान), नालको, दामनजोड़ी, ए चक्रधर, महाप्रबंधक डिजाइन, हिंदुस्थान एरोनॉटिक्स लिमिटेड, केंद्रीय विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी दुर्योधन सेठी, सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉडी पार्क्स ऑफ इंडिया के सलाहकार हरिराम पंसारी, सुरेंद्र सामल, प्रदीप कुमार साहु, सुनाबेड़ा महिला महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ उषारानी दास आदि उपस्थित रहे। हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ चक्रधर पाधान ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया।

निरंजन सामल ने अपने संबोधन में हिंदी को व्यापक संपर्क भाषा तथा ओड़िया को समृद्ध सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बताया। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो पंडा ने भारतीय भाषाओं के पारस्परिक संबंध और बहुभाषी ज्ञान की महत्ता पर बल देते हुए विज्ञान-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय भाषाओं को समृद्ध करने की आवश्यकता रेखांकित की। डॉ मनोज कुमार सिंह ने कार्यक्रम का संचालन किया, जबकि समन्वयक डॉ श्रीकांत आराले ने धन्यवाद ज्ञापन किया। देश के विभिन्न भागों से आए शोधकर्ताओं और प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को सार्थक बनाया।

शब्द निर्माण के सिद्धांतों पर गहन विमर्श

द्वितीय तकनीकी सत्र में शब्द निर्माण के सिद्धांतों पर गहन विमर्श हुआ। हरिराम पंसारी ने संस्कृत में पारिभाषिक शब्द गठन की प्रक्रिया, सरकारी प्रयासों तथा शब्दकोश संपादन की चुनौतियों पर महत्वपूर्ण विचार रखे। सुरेंद्र सामल ने हिंदी-ओड़िया में पारिभाषिक शब्द निर्माण और ओड़िया भाषा की ग्रहणशील प्रकृति पर प्रकाश डाला।

प्रचलित वैज्ञानिक-तकनीकी शब्दावली पर मंथन

जनसंपर्क अधिकारी डॉ फगुनाथ भोई ने बताया कि तृतीय सत्र में प्रो सत्यनारायण पंडा ने तीनों भाषाओं में प्रचलित वैज्ञानिक-तकनीकी शब्दावली के ऐतिहासिक विकास, व्यावहारिक पक्ष तथा वर्तमान आवश्यकताओं का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया। चतुर्थ सत्र में एकरूप शब्दावली निर्माण की समस्याओं, संभावनाओं तथा डिजिटल माध्यम की भूमिका पर चर्चा की गई।

चुनौतियों पर विशेष विमर्श

दूसरे दिन संस्कृत, ओड़िया और हिंदी के लिए संयुक्त शब्द-सूची तैयार करने, भाषा मानकीकरण तथा अनुवाद संबंधी चुनौतियों पर विशेष विमर्श हुआ। गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग के सहायक निदेशक प्रदीप कुमार साहू ने पारिभाषिक शब्दावली निर्माण की व्यावहारिक विधियों पर व्याख्यान दिया। भारतीय भाषा समिति के वरिष्ठ विशेषज्ञ प्रो आरएस सरराजू ने सभी भारतीय भाषाओं के लिए समान शब्दावली की अनिवार्यता पर जोर दिया। एसटीपीआई भुवनेश्वर के परामर्शदाता हरिराम पंसारी की उपस्थिति में शब्दावली के एकीकरण एवं कार्यान्वयन की योजना को अंतिम रूप दिया गया।

ठोस अनुशंसाएं भी प्रस्तुत की गईं

कार्यशाला में वैज्ञानिक-प्रौद्योगिक आधारित शब्दावली के व्यापक प्रयोग तथा संचार को सरल बनाने हेतु ठोस अनुशंसाएं प्रस्तुत की गईं। विश्वविद्यालय के शिक्षक-छात्रों के साथ-साथ डीएवी कॉलेज कोरापुट, सुनाबेड़ा महिला महाविद्यालय, केवी सुनाबेड़ा, नालको, एचएएल और सीसीबीएफ सहित विभिन्न संस्थानों के शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी से यह कार्यक्रम एक जीवंत शैक्षणिक संवाद में परिणत हुआ।

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