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दशकों पुराने कानूनों की जगह लेगा
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भूमि प्रशासन के आधुनिकीकरण और विकास परियोजनाओं को गति देने की दिशा में बड़ा कदम
भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार राज्य में भूमि प्रशासन को आधुनिक, सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाने जा रही है। इसके तहत ओडिशा सरकार भूमि प्रबंधन अधिनियम नाम से एक नया कानून लाने की तैयारी की जा रही है। राज्य के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश कुमार पुजारी ने बताया कि इस अधिनियम का मसौदा तैयार हो चुका है और जल्द ही इसे राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा।
मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित कानून राज्य में लागू कई दशकों पुराने राजस्व कानूनों को एकीकृत करेगा, जो वर्तमान समय की प्रशासनिक और विकासात्मक आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं रह गए हैं। विशेष रूप से 1980 के दशक में बनाए गए ओडिशा भूमि अतिक्रमण निवारण अधिनियम और ओडिशा सरकारी भूमि बंदोबस्त अधिनियम की जगह अब एक समग्र और प्रभावी कानून लाया जाएगा, जिससे भूमि प्रबंधन की प्रक्रिया अधिक सुचारु हो सकेगी।
समस्याओं का समाधान सुनिश्चित होगा
उन्होंने बताया कि इस नए कानून का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया व्यापक और समावेशी रही है। इसके लिए राजस्व मामलों के विशेषज्ञों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, राजस्व आयुक्त, अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व एवं विकास), विधि विभाग के सचिव तथा अनुभवी अधिवक्ताओं से विस्तृत परामर्श किया गया। इसके साथ ही जिला कलेक्टरों से प्राप्त सुझावों को भी शामिल किया गया, ताकि जमीनी स्तर पर आने वाली व्यावहारिक समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
राजस्व विभाग से सैद्धांतिक मंजूरी का इंतजार
राजस्व मंत्री ने आगे कहा कि राजस्व विभाग से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद इस मसौदे को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता वाली राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। मंत्रिमंडल की स्वीकृति के पश्चात इस विधेयक को ओडिशा विधानसभा के आगामी सत्र में पेश करने की योजना है।
मंत्री के अनुसार, नए भूमि प्रबंधन अधिनियम का उद्देश्य कानूनी अस्पष्टताओं को दूर करना, भूमि बंदोबस्त और प्रबंधन की प्रक्रियाओं को सरल बनाना तथा भूमि संबंधी विवादों के त्वरित निपटारे को सुनिश्चित करना है। इससे भूमि प्रशासन अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जनोन्मुखी बनेगा।
सरकारी भूमि का बेहतर उपयोग होगा
सरकार का मानना है कि इस नए कानून के लागू होने से सरकारी भूमि का बेहतर और योजनाबद्ध उपयोग संभव हो सकेगा। इससे राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास और जनकल्याणकारी परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। इस पहल को ओडिशा में भूमि शासन व्यवस्था को मजबूत करने और विकास को नई गति देने वाला एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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