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कटक में सेवा के सात सुपरह्यूमन ने पेश की नई मिसाल
कटक। कटक नगर निगम (सीएमसी) द्वारा संचालित फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) आज सिर्फ एक स्वच्छता इकाई नहीं, बल्कि गरिमा, समावेशन और सामाजिक बदलाव का सशक्त प्रतीक बन चुका है। मटगजपुर स्थित यह प्लांट वैज्ञानिक फीकल स्लज प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभा रहा है, जो राज्य सरकार की जन-केंद्रित और समावेशी शहरी शासन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
गरिमा योजना से जुड़ी मानव कहानी
इस पहल के केंद्र में एक प्रेरक मानवीय कहानी है। एफएसटीपी के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी ओडिशा सरकार की गरिमा योजना के तहत ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों को सौंपी गई है। कभी सामाजिक भेदभाव, उपेक्षा और आर्थिक असुरक्षा झेलने वाले ये लोग आज शहर की एक आवश्यक सेवा के सम्मानित भागीदार बन चुके हैं। आत्मविश्वास, पेशेवर दक्षता और गर्व के साथ वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं।
सेवा में समर्पित सात ‘सुपरह्यूमन’
इस प्लांट की रीढ़ ये सात “सुपरह्यूमन” सुस्री सीतल बस्तिया (स्वयं सहायता समूह की सचिव), तनुश्री बेहरा (स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष), और सदस्य सिवाने, प्रीतम सिंह, सुमन, टिकी और रंजन कुमार साहू हैं।
ये सभी मिलकर प्लांट के दैनिक संचालन को सुचारु रूप से चलाते हैं और पूरे शहर से एकत्र फीकल स्लज के सुरक्षित व वैज्ञानिक उपचार को सुनिश्चित करते हैं, जिससे स्वच्छ मोहल्ले और सुरक्षित शहरी जीवन संभव हो रहा है।
आधुनिक क्षमता और प्रभावी संचालन
एफएसटीपी की उपचार क्षमता 60 केएलडी है। इसके साथ 13 सेसपूल वाहन प्रशिक्षित चालकों और डीस्लजर्स द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। हर महीने सैकड़ों डीस्लजिंग ट्रिप्स के माध्यम से घरों और प्रतिष्ठानों से फीकल स्लज का नियमित, सुरक्षित और वैज्ञानिक उपचार किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों में उल्लेखनीय कमी आई है।
हाशिये से मुख्यधारा तक का सफर
इन कर्मियों की यात्रा समाज के हाशिये से शहरी सेवा की मुख्यधारा तक पहुंचने की कहानी है। यह दर्शाती है कि संवेदनशील और उत्तरदायी नीतियां किस तरह जीवन बदल सकती हैं। जो कल तक अस्तित्व की लड़ाई थी, वही आज उद्देश्य, सम्मान और स्थायी आजीविका का माध्यम बन चुकी है—साथ ही सामाजिक स्वीकृति और आत्मसम्मान भी मिला है।
आवास से मिलेगी स्थिरता और सुरक्षा
गरिमा तभी पूर्ण होती है जब जीवन में स्थिरता हो। इसे ध्यान में रखते हुए ओडिशा सरकार गरिमा कर्मियों को ‘सहजोग’ के माध्यम से नामांकन के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत आवास सुविधा प्रदान करेगी। सुरक्षित और स्थायी आवास से यह समावेशन केवल रोजगार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दीर्घकालिक सुरक्षा, अपनत्व और आत्मसम्मान की ओर बढ़ेगा।
स्वच्छता से आगे, लोगों तक पहुंचती नीति
आवास एवं शहरी विकास विभाग, ओडिशा सरकार का यह एकीकृत दृष्टिकोण स्पष्ट करता है कि स्वच्छता केवल ढांचे का विषय नहीं, बल्कि लोगों का विषय है। सामाजिक समावेशन, आजीविका सुरक्षा और आवास को शहरी सेवाओं से जोड़कर ओडिशा ने ऐसी शासन प्रणाली की मिसाल पेश की है जो सुनती है, संवेदनशील है और परिणाम देती है।
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