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श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति ने दिशानिर्देशों के मसौदे को दी स्वीकृति
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सरकार को भेजा जाएगा मसौदा: मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी
पुरी। श्रीजगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में सुरक्षित आभूषणों की गणना को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। हाल ही में हुई श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में रत्न भंडार के आभूषणों की गणना से संबंधित दिशानिर्देशों के मसौदे को स्वीकृति दी गई। हालांकि, अंतिम निर्णय राज्य सरकार की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा।
श्रीजगन्नाथ मंदिर के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने बताया कि स्वीकृत मसौदे को राज्य सरकार के पास अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा। सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद ही इस संबंध में औपचारिक घोषणा की जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि रत्न भंडार की गणना की प्रक्रिया में मंदिर की परंपरा और पवित्रता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। प्रशासन पूरी पारदर्शिता और सुचारु व्यवस्था के साथ कार्य सुनिश्चित करेगा।
नई रत्न पलंग की तैयारी पूरी
बैठक में अन्य कई महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हुई। समिति को बताया गया कि महाप्रभु श्रीजगन्नाथ के लिए नया रत्न पलंग तैयार कर लिया गया है। इसे किसी शुभ मुहूर्त में विधिवत रूप से स्थापित किया जाएगा।
श्री गुंडिचा मंदिर के पुनः उद्घाटन पर निर्णय बाद में
श्री गुंडिचा मंदिर के पुनः उद्घाटन को लेकर भी चर्चा हुई। समिति ने स्पष्ट किया कि इस पर अंतिम निर्णय अनुष्ठानों की अनुकूलता और तिथियों को ध्यान में रखते हुए लिया जाएगा।
भीड़ नियंत्रण के लिए 10 रुपये प्रवेश शुल्क
मंदिर में भीड़ प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से समिति ने प्रवेश शुल्क 10 रुपये निर्धारित करने का निर्णय लिया है। हालांकि, बच्चों और दिव्यांग श्रद्धालुओं को इस शुल्क से मुक्त रखा गया है। मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने स्पष्ट किया कि यह शुल्क राजस्व अर्जन के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगाया गया है।
भक्त निवासों में पार्किंग शुल्क घटा
श्रद्धालुओं को राहत देते हुए समिति ने चार भक्त निवास परिसरों में पार्किंग शुल्क को 500 रुपये से घटाकर 240 रुपये कर दिया है। इससे दर्शन के लिए आने वाले भक्तों का आर्थिक बोझ कम होगा।
सेवायतों के लिए मोबाइल उपयोग पर सख्ती
मंदिर परिसर के भीतर सेवायतों द्वारा मोबाइल फोन के खुले उपयोग पर रोक लगा दी गई है। सेवायत अब मंदिर शाखा कार्यालय में जाकर ही आवश्यक संचार कर सकेंगे। मुख्य प्रशासक ने चेतावनी दी कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
परंपरा, व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा पर जोर
प्रबंध समिति के निर्णयों से स्पष्ट है कि मंदिर प्रशासन परंपरा की पवित्रता बनाए रखते हुए व्यवस्था सुधार और श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। रत्न भंडार की गणना से लेकर भीड़ नियंत्रण और सुविधाओं तक, हर निर्णय इसी संतुलन को ध्यान में रखकर लिया जा रहा है।
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