-
संघर्ष से नेतृत्व तक तय किया सफर
-
म सुवाहक योजना ने बनाया सशक्त
भुवनेश्वर। ओडिशा में महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरक मिसाल बनकर उभरी हैं केंदुझर जिले की संतोषी देव। निजी जीवन के गहरे संघर्षों से निकलकर उन्होंने न केवल अपनी पहचान बनाई, बल्कि यह भी सिद्ध किया कि जब साहस, संकल्प और राज्य का सहयोग साथ हो, तो पीड़ा शक्ति में और संघर्ष नेतृत्व में बदल सकता है।
कम उम्र में विवाह, हिंसा और फिर अकेली लड़ाई
हरियाणा में मात्र 16 वर्ष की उम्र में विवाह के बाद संतोषी को दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा। पति द्वारा छोड़ दिए जाने के बाद वे अपनी बेटी के साथ केंदुझर लौट आईं। स्कूल की पढ़ाई अधूरी, आजीविका का कोई साधन नहीं और अकेले मातृत्व की जिम्मेदारी। इन तमाम चुनौतियों के बावजूद संतोषी ने हार नहीं मानी, बल्कि अपने भविष्य को नए सिरे से गढ़ने का साहसिक निर्णय लिया।
लैंगिक रूढ़ियों को तोड़ते हुए बनीं ऑटो चालक
चेन्नई में एक महिला ऑटो चालक को देखकर प्रेरित होकर वर्ष 2015 में संतोषी ने केंदुझर की पहली महिला ऑटो चालक बनकर इतिहास रच दिया। यह केवल रोजगार का साधन नहीं था, बल्कि सामाजिक सोच को चुनौती देने वाला कदम था। उनकी मेहनत और आत्मविश्वास को जल्द ही पहचान मिली और वे महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गईं।
ओडिशा की पहली महिला ‘मो बस’ चालक
वर्ष 2021 में संतोषी ने एक और उपलब्धि हासिल की जब वे भुवनेश्वर में ओडिशा की पहली महिला ‘मो बस’ चालक बनीं। इस उपलब्धि ने राज्य भर की महिलाओं को यह संदेश दिया कि परंपरागत पेशों की सीमाएं अब टूट रही हैं और महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं।
भारी वाहनों की कमान, फिर एक नया कीर्तिमान
सामाजिक रूढ़ियों को लगातार चुनौती देते हुए संतोषी ने भारी मशीनरी चलाने का प्रशिक्षण लिया और केंदुझर जिले के गुआली क्षेत्र में त्रिवेणी प्राइवेट लिमिटेड के साथ 40 मीट्रिक टन वजनी वोल्वो ट्रक चलाया। पुरुष-प्रधान माने जाने वाले इस क्षेत्र में उनकी दक्षता और पेशेवर क्षमता ने यह स्पष्ट कर दिया कि योग्यता का कोई लिंग नहीं होता।
ऑटो से तय नई दिल्ली और अयोध्याय की दूरी
अपने निजी कानूनी संघर्षों में न्याय की गुहार लगाने के लिए संतोषी ने लगभग 1,600 किलोमीटर की दूरी ऑटो रिक्शा से तय कर नई दिल्ली तक का सफर किया। बाद में वे केंदुझर से अयोध्या तक वाहन चलाकर राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में भी पहुंचीं। इन यात्राओं ने कई राज्यों में उनकी दृढ़ता और साहस की सराहना कराई।
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह में हुआ सम्मान
जनवरी 2026 में आयोजित राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के कार्यक्रम में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने संतोषी देव को “केंदुझर की बेटी” बताते हुए उनके साहस, आत्मनिर्भरता और ओडिशा की अस्मिता का प्रतीक कहा। यह सम्मान उनके संघर्ष और उपलब्धियों की सार्वजनिक स्वीकृति बना।
आम सुवाहक योजना से मिली नई उड़ान
संतोषी देव को वाणिज्य एवं परिवहन विभाग, ओडिशा सरकार की प्रमुख योजना आम सुवाहक की लाभार्थी के रूप में भी प्रस्तुत किया गया। इस योजना के तहत परिवहन क्षेत्र में महिला उद्यमियों को 10 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त ऋण, विद्युत वाहनों के लिए अतिरिक्त अनुदान और संस्थागत सहयोग प्रदान किया जाता है। इस सहायता से संतोषी आज चार पहिया वाहन की स्वामिनी और उभरती हुई महिला उद्यमी हैं।
नई ओडिशा की प्रतीक संतोषी देव
हिंसा की शिकार से लेकर आत्मविश्वासी नेतृत्वकर्ता तक का संतोषी देव का सफर नई ओडिशा की तस्वीर पेश करता है, जहां महिलाएं अवसरों से सशक्त हो रही हैं, नीतियों से समर्थित हैं और समाज का नेतृत्व करने के लिए प्रेरित हैं। उनका जीवन यह संदेश देता है कि साहस और संस्थागत सहयोग के साथ कोई भी बाधा अजेय नहीं और कोई भी यात्रा असंभव नहीं।
Indo Asian Times A Hindi Digital News Portal
