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सीआरयूटी कार्यालय में उच्चस्तरीय समिति की बैठक आयोजित
भुवनेश्वर। आम बस सेवा के संचालन को और अधिक सुरक्षित, यात्री-अनुकूल एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से सीआरयूटी कार्यालय में एक उच्चस्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता आवास एवं शहरी विकास विभाग की प्रमुख सचिव उषा पाढ़ी ने की। बैठक में सड़क सुरक्षा, यात्रियों की सुविधा, चालकों के कौशल विकास और उनके कल्याण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में बढ़ते भारी वाहन यातायात को ध्यान में रखते हुए सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया। समिति ने यात्री-अनुकूल सेवाओं को मजबूत करने और बस संचालन की नियमित व व्यवस्थित निगरानी की समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि जनवरी के पहले दो सप्ताह के दौरान आम बसों की गति सीमा की कड़ी निगरानी की गई, जिसमें किसी भी प्रकार के गति उल्लंघन का मामला सामने नहीं आया।
बस स्टॉप प्रबंधन और संचालन व्यवस्था पर चर्चा
बैठक में बस स्टॉप पर बेहतर ठहराव व्यवस्था, यात्रियों के लिए सुविधाजनक प्रबंधन और संचालन प्रणाली को और सुदृढ़ करने पर भी विचार किया गया, ताकि यात्रियों को सुचारु और सुरक्षित यात्रा अनुभव मिल सके।
चालक प्रशिक्षण को मिलेगी नई मजबूती
चालकों के प्रशिक्षण को सशक्त बनाने के लिए ई-बसों को ड्राइविंग प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (आईडीटीआर) को उपलब्ध कराया जाएगा। इससे चालक प्रशिक्षण परिसर के भीतर ही प्रतिदिन व्यावहारिक ड्राइविंग प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे। प्रशिक्षण अवसंरचना को मजबूत करने के लिए छटिया, ब्रह्मपुर और बोणई (सुंदरगढ़) में मल्टी-चार्जिंग अवसंरचना विकसित करने की योजना बनाई गई है। इन केंद्रों पर निजी विद्युत वाहनों और सरकारी वाहनों के लिए भी चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे आम जनता को चार पहिया ईवी चार्जिंग का लाभ मिल सकेगा।
कैप्टन और गाइड के लिए प्रोत्साहन योजना
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि 26 जनवरी से आम बस के कैप्टन और गाइड के लिए प्रोत्साहन योजना लागू की जाएगी। यह प्रोत्साहन तिमाही आधार पर सुरक्षित ड्राइविंग व्यवहार और समग्र प्रदर्शन के व्यापक मूल्यांकन के बाद प्रदान किया जाएगा।
जनभागीदारी से तय होंगे रूट और सेवाएं
फरवरी से आम बस रूट योजना और सेवाओं में जनभागीदारी की शुरुआत की जाएगी। इसके तहत नागरिक सोशल मीडिया मंचों के माध्यम से रूट परिवर्तन, सेवाओं और सुविधाओं को लेकर अपने सुझाव और प्रतिक्रिया साझा कर सकेंगे।
प्रशिक्षण अवधि बढ़ी, आधुनिक तकनीक पर जोर
चालक प्रशिक्षण कार्यक्रम की अवधि तीन दिन से बढ़ाकर पांच दिन कर दी गई है, जिससे भारी मोटर वाहन चलाने का अधिक अभ्यास संभव हो सके। प्रशिक्षण में साइकोमेट्रिक परीक्षण, इनहिबिटर, लेन अनुशासन और स्व-मूल्यांकन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही, ई-बस के विशेष प्रशिक्षण के लिए प्रशिक्षण विद्यालयों में सिम्युलेटर भी शुरू किए जाएंगे।
पुरानी बसें होंगी स्क्रैप, छोटी ई-बसें होंगी शामिल
यात्री सुरक्षा और पर्यावरणीय सततता को ध्यान में रखते हुए 1.5 लाख किलोमीटर से अधिक चल चुकी 30 पुरानी बीपीटीएसएल बसों को स्क्रैप करने का निर्णय लिया गया है। इनके स्थान पर भुवनेश्वर और कटक में छोटी ई-बसें शुरू की जाएंगी, जिससे अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी बेहतर हो सकेगी।
हर 15 दिन में होगी समीक्षा
बैठक में यह भी बताया गया कि उषा पाढ़ी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है, जो हर 15 दिन में आम बस संचालन की समीक्षा करेगी। इससे सेवा की निरंतर निगरानी और सुधार सुनिश्चित किया जा सकेगा।
बैठक में परिवहन आयुक्त अमिताभ ठाकुर, सीआरयूटी के प्रबंध निदेशक संजय बिस्वाल, पुलिस आयुक्तालय के डीसीपी और यातायात डीसीपी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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