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आईआरआरआई और ओडिशा सरकार के सहयोग से भुवनेश्वर में दो दिवसीय मंथन
भुवनेश्वर। ओडिशा में स्वास्थ्यवर्धक और पोषणयुक्त चावल को कृषि-खाद्य प्रणाली का अभिन्न हिस्सा बनाने की दिशा में एक अहम पहल के तहत अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई) और कृषि एवं कृषक सशक्तीकरण विभाग, ओडिशा सरकार के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। “ओडिशा की कृषि-खाद्य प्रणाली में स्वास्थ्यवर्धक चावल का स्थान और विस्तार” विषय पर यह कार्यशाला 12 और 13 जनवरी को भुवनेश्वर स्थित मेफेयर लैगून में आयोजित हुई।
नीति-निर्माताओं से किसानों तक एक मंच पर
इस कार्यशाला में नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, बीज प्रणाली विशेषज्ञों, निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों, किसान संगठनों और विकास भागीदारों ने भाग लिया। सभी हितधारकों ने मिलकर ओडिशा और देशभर में विशेष श्रेणी के चावल, जैसे जिंक-समृद्ध, आयरन-समृद्ध, प्रोटीन-समृद्ध और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले चावल, को मुख्यधारा में लाने के लिए एक स्पष्ट और व्यावहारिक रोडमैप पर चर्चा की।
पोषण, जलवायु और आय का समाधान
स्वास्थ्य और पोषण के प्रति बढ़ती उपभोक्ता जागरूकता के बीच विशेष चावल किस्में एक प्रभावी समाधान के रूप में उभरी हैं, जो बेहतर पोषण, जलवायु सहनशीलता और किसानों की आय में वृद्धि, तीनों को एक साथ साधती हैं। लगभग 11 मिलियन टन वार्षिक धान उत्पादन, सशक्त वैज्ञानिक आधार और सक्रिय सरकारी समर्थन के साथ ओडिशा इस परिवर्तन में अग्रणी राज्य के रूप में उभरा है।
पहलों को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया गया
आईआरआरआई और अन्य संस्थानों के सहयोग से ओडिशा में सहभागी किस्म चयन, खेत स्तर पर परीक्षण, सामुदायिक बीज उत्पादन और मूल्य शृंखला विकास जैसी पहलों को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया गया है। इन प्रयासों ने स्वास्थ्यवर्धक चावल को शोध से बाजार तक पहुंचाने की मजबूत नींव रखी है।
उद्घाटन सत्र में वरिष्ठ विशेषज्ञों की भागीदारी
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में आईआरआरआई, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से जुड़े संस्थानों, ओडिशा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और ओडिशा सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। दो दिनों के दौरान जैव-संपोषित और कम जीआई चावल में हालिया प्रगति, बीज विस्तार रणनीतियां, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़ने के उपायों के साथ-साथ सार्वजनिक खाद्य, पोषण और खरीद कार्यक्रमों में स्वास्थ्यवर्धक चावल को शामिल करने पर गहन चर्चा हुई।
व्यावहारिक रोडमैप और नीति सुझाव तैयार
आईआरआरआई की वैज्ञानिक और दक्षिण एशिया बीज प्रणाली प्रमुख डॉ स्वाति नायक ने बताया कि इस कार्यशाला से विशेष चावल के विस्तार के लिए एक व्यावहारिक रोडमैप सामने आया है। इसके साथ ही नीति संबंधी सुझाव, बीज विस्तार की योजना और बाजार विकास का ढांचा भी तैयार किया गया है, जिससे इन किस्मों को स्थायी रूप से अपनाने में मदद मिलेगी।
सहयोग को बताया गया सफलता की कुंजी
कार्यशाला का एक प्रमुख निष्कर्ष यह रहा कि सरकार, अनुसंधान संस्थानों, बीज निगमों, निजी क्षेत्र और किसान संस्थाओं के बीच मजबूत सहयोग ही स्वास्थ्यवर्धक चावल को व्यापक स्तर पर अपनाने की सफलता की कुंजी है।
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