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ओड़िशा के लोगों के सपनों को साकार करने के लिए हमें अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी : प्रधान
भुवनेश्वर। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि 2036 तक विकसित ओडिशा के सपने को साकार करने के लिए हर ओड़िया को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। उन्होंने कहा कि ओडिशा को कुपोषण से मुक्त करने, सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगाने और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण जैसे प्रयासों में सभी को सक्रिय भागीदारी निभानी होगी। जब हम अपने कर्तव्यों को सही तरीके से समझेंगे, तभी विकसित ओडिशा के माध्यम से विकसित भारत का सपना साकार हो सकेगा और सभी के अधिकार सुनिश्चित होंगे।
नई दिल्ली में ‘विकसित भारत यंग लीडर डायलॉग-2026’ के लिए चयनित ओडिशा के युवा प्रतिनिधियों से बातचीत करते हुए प्रधान ने कहा कि इस मंच का मुख्य उद्देश्य युवाओं की छिपी हुई प्रतिभा को सामने लाना और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देना है। उन्होंने कहा कि देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव लाने के उद्देश्य से लागू किया गया है, जिससे न केवल शहरी बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को भी समान अवसर मिल रहे हैं। इस नई शिक्षा नीति की सबसे बड़ी ताकत प्रौद्योगिकी है।
उन्होंने कहा कि एआई के इस युग में भाषा अब बाधा नहीं रहेगी। आईआईटी मद्रास में अंग्रेजी में पढ़ाए जाने वाले जटिल विषयों को अब एआई की मदद से मातृभाषा में भी उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे रायगढ़ या कोरापुट जैसे दूरदराज क्षेत्रों के छात्र भी अपनी भाषा में विश्वस्तरीय शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। एआई क्षेत्र में काम कर रही कंपनी ‘सरवम’ के सह-संस्थापक, ओड़िया युवा प्रतीक कुमार ने ओडिशा का गौरव बढ़ाया है।
प्रधान ने कहा कि वर्षों तक देश मैकाले द्वारा तैयार की गई शिक्षा प्रणाली से बंधा रहा, जहां केवल डिग्री को महत्व दिया जाता था। लेकिन आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ‘डिग्री से अधिक कौशल’ को प्राथमिकता दी जा रही है। अब स्कूल स्तर से ही छात्र अपनी रुचि के अनुसार कोडिंग, संगीत, खेल या तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में स्पोर्ट्स कोटा की शुरुआत को उन्होंने शिक्षा प्रणाली में एक युगांतकारी कदम बताया।
उन्होंने कहा कि जब देश ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, तब नई पीढ़ी को आधुनिक दुनिया की जरूरतों के अनुरूप अभी से तैयार करना जरूरी है। युवाओं को केवल नौकरी पाने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाना हमारा लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि 2036 में ओडिशा के भाषा-आधारित शताब्दी वर्ष के अवसर पर 100 स्टार्टअप स्थापित किए जाएंगे, जिनमें से प्रत्येक का अनुमानित मूल्य 100 करोड़ रुपये होगा।
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