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ओडिशा में रेत से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं पर सरकार का सख्त रुख

  •    परिवहन आयुक्त ने दी कड़ी चेतावनी, जिम्मेदार एजेंसियों को निर्देश

भुवनेश्वर। ओडिशा में राजमार्गों और शहरी सड़कों पर फैली रेत, मिट्टी और निर्माण मलबे के कारण हो रही लगातार जानलेवा सड़क दुर्घटनाओं पर राज्य के परिवहन आयुक्त ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। इस संबंध में उन्होंने सड़क स्वामित्व और रखरखाव से जुड़े सभी प्रमुख विभागों को सख्त निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि सड़कों को सुरक्षित, स्वच्छ और यातायात योग्य बनाए रखना संबंधित एजेंसियों की कानूनी जिम्मेदारी है।

परिवहन आयुक्त ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के क्षेत्रीय अधिकारियों, राष्ट्रीय राजमार्ग (ओडिशा) के मुख्य अभियंता, लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता, सभी नगर निगमों, नगरपालिकाओं और एनएसी अधिकारियों को यह निर्देश भेजा है।

इन सभी एजेंसियों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली सड़कों की नियमित निगरानी और सफाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।

रेत और मलबा तत्काल हटाने का आदेश

परिवहन आयुक्त ने चेतावनी दी है कि यदि किसी भी सड़क पर रेत, मिट्टी, निर्माण मलबा या अन्य ढीली सामग्री पाई जाती है, तो उसे तत्काल हटाना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर संबंधित एजेंसी की जवाबदेही तय की जाएगी।

आयुक्त का स्पष्ट संदेश

अपने पत्र में परिवहन आयुक्त ने कहा कि सड़क की सतह पर फैली रेत, मिट्टी, निर्माण मलबा और अन्य ढीली सामग्री यदि समय रहते नहीं हटाई जाती है, तो टायरों की पकड़ कमजोर हो जाती है। इसका सबसे ज्यादा असर दोपहिया वाहनों पर पड़ता है, जिससे फिसलने और गंभीर व घातक दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। हाल के दिनों में राज्य भर में कई बड़े हादसे सामने आए हैं, जिनमें सड़क पर फैली रेत एक प्रमुख कारण रही है।

दुर्घटना रोकथाम की जिम्मेदारी एजेंसियों की

परिवहन आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही प्रवर्तन एजेंसियां रेत और निर्माण सामग्री के असुरक्षित परिवहन पर कार्रवाई कर रही हों, लेकिन दुर्घटनाओं की रोकथाम की मुख्य जिम्मेदारी सड़क के स्वामी और रखरखाव करने वाली एजेंसियों की ही है। पत्र में कहा गया है कि अपने अधिकार क्षेत्र की सड़कों को हर समय स्वच्छ, सुरक्षित और खतरे से मुक्त बनाए रखना संबंधित एजेंसियों का अनिवार्य दायित्व है।

मोटर वाहन अधिनियम का हवाला

पत्र में मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 198ए का भी उल्लेख किया गया है। इस धारा के तहत सड़क डिजाइन, निर्माण और रखरखाव के मानकों का पालन न करने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। इससे सड़क रखरखाव से जुड़ी एजेंसियों की जवाबदेही और अधिक सख्त हो जाती है।

नियमित सफाई और निगरानी के निर्देश

सभी एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे सड़कों की नियमित और यांत्रिक सफाई कराएं, रेत या मलबा गिरने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करें, दुर्घटना संभावित और संवेदनशील मार्गों की पहचान करें और प्रवर्तन एजेंसियों के साथ करीबी समन्वय बनाए रखें। निरीक्षण या दुर्घटना जांच के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही पाए जाने पर मैदानी स्तर के अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

पत्रकार की मौत के बाद सरकार सख्त

गौरतलब है कि यह सख्ती उस दर्दनाक हादसे के कुछ ही दिनों बाद सामने आई है, जिसमें भुवनेश्वर-पुरी राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-316) पर सड़क पर बिखरी रेत के कारण स्कूटर फिसलने से एक बस ने दो महिलाओं को कुचल दिया। इस हादसे में एक प्रमुख ओड़िया समाचार चैनल में कार्यरत पत्रकार शीला पटनायक की मौके पर ही मौत हो गई थी। उनकी साथी सिपिका नायक, जो भुवनेश्वर की रहने वाली थीं, को गंभीर हालत में पिपिली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने भी दम तोड़ दिया।

मीडिया कर्मियों में शोक, सुरक्षा पर सवाल

इस घटना के दिन ओडिशा वूमेन इन मीडिया के बैनर तले पत्रकारों ने शीला पटनायक की स्मृति में प्रार्थना सभा आयोजित की, जिसमें उनके परिजन भी शामिल हुए। सभा के दौरान राज्य भर में सड़कों पर फैली रेत से हो रही दुर्घटनाओं और बढ़ते खतरे को लेकर गहरी चिंता जताई गई।

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