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mohan charan majhi मोहन चरण माझी

सियासत के नए धुरंधर मोहन चरण माझी

मोहन चारण माझी  के जन्मदिन 6 जनवरी पर विशेष

  • आदिवासी अंचल से सत्ता के शिखर तक

  • अनुभव, अनुशासन और संवेदनशीलता के बल पर ओडिशा की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी का सफर केवल राजनीतिक पदों की सीढ़ियां चढ़ने की कहानी नहीं है, बल्कि जनता के दुख-दर्द को समझने, जमीनी सच्चाइयों से सीख लेने और उन्हें नीति व निर्णयों में उतारने की यात्रा है।

मुख्यमंत्री के रूप में मोहन माझी ने खुद को ‘जनता के मुख्यमंत्री’ के रूप में स्थापित किया है। जनसुनवाई को उन्होंने शासन का मूल मंत्र बनाया है, ताकि आम नागरिक की आवाज सीधे सत्ता तक पहुंचे। उनकी कार्यशैली में संवाद, पारदर्शिता और जवाबदेही साफ दिखाई देती है। ‘विकसित ओडिशा 2036’ के दूरदर्शी मिशन के साथ वे राज्य को आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहे हैं। नई सोच, दृढ़ इच्छाशक्ति और जमीनी जुड़ाव के साथ मोहन माझी आज ओडिशा की राजनीति में बदलाव और विकास के नए अध्याय के सूत्रधार बनकर उभर रहे हैं।

इण्डो एशियन टाइम्स, भुवनेश्वर। 

शिक्षक से सरपंच, विधायक से विपक्ष के मुख्य सचेतक और फिर ओडिशा के मुख्यमंत्री बने मोहन चरण माझी का राजनीतिक सफर लोकतंत्र की उस ताकत का उदाहरण है, जहां आखिरी पंक्ति का व्यक्ति भी पहले स्थान तक पहुंच सकता है। उनका जीवन संघर्ष, सादगी, संगठनात्मक निष्ठा और निरंतर मेहनत की कहानी है। एक आदिवासी बहुल, अपेक्षाकृत पिछड़े इलाके से निकलकर राज्य के सर्वोच्च पद तक पहुंचना केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिनिधित्व के नए दौर का संकेत भी है।

जन्म, पारिवारिक पृष्ठभूमि और शिक्षा

मोहन चरण माझी का जन्म 6 जनवरी 1972 को ओडिशा के केंदुझर जिले के रायकला गांव में हुआ। वे संथाल आदिवासी समुदाय से आते हैं। उनके पिता गुनाराम माझी सरकारी स्कूल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे। सीमित आय, साधारण रहन-सहन और ग्रामीण जीवन की कठिनाइयों में बचपन बीता। स्कूली शिक्षा झुम्पुरा क्षेत्र में हुई। आनंदपुर कॉलेज से हाईस्कूल और चंद्रशेखर कॉलेज, चंपुआ से बीए किया। ढेंकनाल लॉ कॉलेज से एलएलबी भी किया। कानून की पढ़ाई ने उन्हें संविधान, अधिकारों और प्रशासनिक प्रक्रिया की समझ दी, जो आगे उनके विधायी और राजनीतिक जीवन में साफ दिखी।

नौकरी और सामाजिक जुड़ाव 

पढ़ाई पूरी कर मोहन माझी ने सरस्वती शिशु मंदिर, झुम्पुरा में शिक्षक (गुरुजी) के रूप में काम किया। शिक्षक के रूप में उन्होंने बच्चों और अभिभावकों के बीच भरोसा बनाया और समाज की जमीनी समस्याओं-शिक्षा, गरीबी, पलायन को नजदीक से देखा। यही दौर था जब उनका सामाजिक जुड़ाव गहरा हुआ और वे धीरे-धीरे सार्वजनिक जीवन की ओर बढ़े।

राजनीति की शुरुआत : पंचायत से विधानसभा तक

मोहन चरण माझी ने राजनीति की शुरुआत छोटे मंच से की। वे 1997 में रायकला पंचायत के सरपंच बने और गांव के बुनियादी मुद्दों-सड़क, पानी, शिक्षा और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर काम किया। यहीं प्रशासनिक समझ और जन-संपर्क की असली पाठशाला मिली। भाजपा संगठन में भी सक्रिय भूमिका निभाई। बूथ स्तर से संगठन को समझना, कार्यकर्ताओं के साथ काम करना और जमीन से जुड़े मुद्दों को उठाना, इसे समर्पित भाव से किया। सक्रियता और जमीनी पकड़ के चलते 2000 में वे भाजपा के टिकट पर क्योंझर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। इसके बाद 2004, 2019 और 2024 में भी इसी सीट से जीते। विधायक रहते हुए भी पार्टी संगठन और विधानसभा दोनों में सक्रिय भूमिका निभाई। 2019 के बाद विधानसभा में वे भाजपा के मुख्य सचेतक बने। वे ओडिशा विधानसभा के स्पीकर भी रह चुके हैं।

सबसे बड़ी ताकत

उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी जमीनी पकड़, सादगी और आदिवासी समाज से गहरा जुड़ाव है। वे संवाद में सरल, निर्णय में व्यावहारिक और संगठन के प्रति निष्ठावान माने जाते हैं। केंद्र और राज्य नेतृत्व के बीच संतुलन साधना भी उनकी बड़ी क्षमता है।

लोकप्रियता के कारण 

उनकी लोकप्रियता का मूल कारण अपनों में से एक की छवि है। वे भाषणों से ज्यादा काम और संपर्क में विश्वास रखते हैं। आम कार्यकर्ता से लेकर ग्रामीण मतदाता तक, उन्हें एक सुलभ नेता के रूप में देखते हैं।

बड़ा लक्ष्य

12 जून 2024 को मुख्यमंत्री बने मोहन मांझी ने 2036 तक ओडिशा को 500 बिलियन डॉलर की इकोनॉमी वाला राज्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

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