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ओडिशा में डॉक्टरों का आंदोलन  हुआ तेज

  •     सरकारी अस्पतालों में दो घंटे ठप रहीं ओपीडी सेवाएं

  •     रिक्त पदों की तत्काल भर्ती की मांग

  •     सरकार को 14 जनवरी तक का अल्टीमेटम

भुवनेश्वर। ओडिशा में डॉक्टरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। सोमवार को राज्यभर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में आउट पेशेंट डिपार्टमेंट (ओपीडी) सेवाएं सुबह 9 बजे से 11 बजे तक दो घंटे के लिए बंद रहीं। यह आंदोलन ओडिशा मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (ओएमएसए) के नेतृत्व में किया जा रहा है।

ओएमएसए ने इससे पहले एक घंटे के लिए ओपीडी बंद रखकर विरोध दर्ज कराया था, लेकिन सरकार की ओर से संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिलने के कारण अब इसे दो घंटे तक बढ़ा दिया गया। इस दौरान डॉक्टरों ने ओपीडी में मरीजों को नहीं देखा, हालांकि आपातकालीन सेवाएं पूरी तरह से चालू रहीं।

रिक्त पदों से बढ़ा काम का बोझ

डॉक्टरों की प्रमुख मांग राज्य में स्वीकृत लेकिन लंबे समय से खाली पड़े डॉक्टरों के पदों को तत्काल भरने की है। एसोसिएशन का कहना है कि स्टाफ की भारी कमी के कारण मौजूदा डॉक्टरों पर अत्यधिक कार्यभार पड़ रहा है, जिससे न केवल उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है बल्कि मरीजों को भी समय पर समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है।

आंदोलन में शामिल एक डॉक्टर ने कहा कि ओएमएसए के अध्यक्ष और सचिव ने पहले ही सरकार को समस्याओं से अवगत कराया था, लेकिन उस पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। मजबूरन डॉक्टरों को आंदोलन तेज करना पड़ा।

14 जनवरी तक कार्रवाई नहीं तो आंदोलन और तेज

ओएमएसए ने चेतावनी दी है कि यदि 14 जनवरी तक सरकार ने उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में सुबह और दोपहर दोनों सत्रों में दो-दो घंटे तक ओपीडी सेवाएं निलंबित की जा सकती हैं। इससे राज्यभर में स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है।

सरकार ने बनाई अंतर-विभागीय समिति

डॉक्टरों के आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने उनकी मांगों की जांच के लिए एक अंतर-विभागीय समिति का गठन किया है। यह समिति जल्द ही सभी संबंधित पक्षों से चर्चा कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि समिति बनाना तभी सार्थक होगा जब इसके आधार पर जल्द निर्णय लिए जाएं।

आपात सेवाएं रहीं चालू, मरीजों ने जताई समझदारी

डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि आंदोलन के दौरान आपातकालीन सेवाएं बाधित नहीं की गईं ताकि गंभीर मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। कटक के सिटी अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि मरीजों को कष्ट न पहुंचे, इसी कारण आपात सेवाएं जारी रखी गई हैं। कई मरीजों ने भी डॉक्टरों की समस्याओं को समझते हुए समर्थन जताया। अस्पतालों में मौजूद मरीजों को पहले से आंदोलन की जानकारी दी गई थी और उन्हें आश्वासन दिया गया कि सुबह 11 बजे के बाद ओपीडी सेवाएं सामान्य रूप से बहाल कर दी जाएंगी।

पहले भी किए थे आंदोलन

ओएमएसए ने इससे पहले एक घंटे का ओपीडी बंद रखा था, लेकिन सरकार की ओर से संतोषजनक प्रतिक्रिया न मिलने के कारण आंदोलन की अवधि बढ़ाकर दो घंटे कर दी गई। इस दौरान डॉक्टरों ने ओपीडी में मरीजों को देखना बंद रखा, जबकि आपातकालीन सेवाएं बिना किसी बाधा के जारी रहीं।

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