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राज्य सरकार ने 735 करोड़ रुपये की एकमुश्त सहायता को दी मंजूरी
भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने राज्यभर में स्मार्ट बिजली मीटर लगाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद ऊर्जा विभाग ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 735 करोड़ रुपये की एकमुश्त अनुदान राशि को स्वीकृति प्रदान की है। इसके तहत 2 किलोवाट तक की अनुबंधित मांग वाले बिजली उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे।
सरकारी निर्णय के अनुसार, यह योजना मौजूदा गैर-स्मार्ट मीटरों को बदलने के साथ-साथ नए बिजली कनेक्शनों पर भी लागू होगी। 2 किलोवाट या उससे कम लोड वाले उपभोक्ताओं के घरों और प्रतिष्ठानों में स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे, जिससे बिजली खपत की सटीक निगरानी और बिलिंग व्यवस्था को और पारदर्शी बनाया जा सकेगा।
ऊर्जा विभाग का होगा स्वामित्व
स्मार्ट मीटर की संपत्ति का स्वामित्व ऊर्जा विभाग, ओडिशा सरकार के पास रहेगा, जबकि इनके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित बिजली वितरण कंपनियों यानी डिस्कॉम पर होगी। इनमें टाटा पावर की चारों कंपनियां, टीपीसीओडीएल, टीपीएनओडीएल, टीपीएसओडीएल और टीपीडब्ल्यूओडीएल शामिल हैं। सरकार की ओर से दी जाने वाली राशि को ग्रिडको के माध्यम से राज्य की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए डिफर्ड इक्विटी के रूप में समायोजित किया जाएगा।
8.75 लाख पुराने मीटर होंगे प्रतिस्थापित
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 2 किलोवाट तक लोड वाले उपभोक्ताओं के लगभग 8.75 लाख मौजूदा गैर-स्मार्ट मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदला जाएगा। इसके लिए अनुमानित पूंजीगत लागत 340 करोड़ रुपये तय की गई है।
2.78 लाख नए कनेक्शनों पर स्मार्ट मीटर
इसके अलावा करीब 2.78 लाख नए बिजली कनेक्शनों पर भी स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। इस मद में 88 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस तरह योजना के तहत स्मार्ट मीटर स्थापना पर कुल पूंजीगत व्यय 428 करोड़ रुपये होगा।
मीटर किराया पूरी तरह खत्म
735 करोड़ रुपये की कुल राशि में से शेष 307 करोड़ रुपये का उपयोग उन स्मार्ट मीटरों की अपूर्ण लागत को समायोजित करने में किया जाएगा, जो 31 मार्च 2025 तक पात्र उपभोक्ताओं के यहां पहले ही लगाए जा चुके हैं। ओडिशा विद्युत नियामक आयोग के 24 मार्च 2025 के टैरिफ आदेश के अनुसार, 2 किलोवाट तक की अनुबंधित मांग वाले उपभोक्ताओं से मीटर किराया समाप्त कर दिया गया है।
उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा कोई अतिरिक्त बोझ
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि मार्च 2025 से पहले जिन उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाए गए थे, उनसे भी अब कोई मीटर किराया नहीं लिया जाएगा। इस पूरी लागत को सरकार इस एकमुश्त अनुदान के जरिए स्वयं वहन करेगी, जिससे उपभोक्ताओं पर किसी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।
पुराने बदले गए मीटरों के स्क्रैप से होने वाली आय को ओईआरसी के टैरिफ नियमों के अनुसार गैर-टैरिफ आय के रूप में वार्षिक राजस्व आवश्यकता में शामिल किया जाएगा। वहीं, डिस्कॉम को लगाए गए मीटरों की वास्तविक संख्या और खर्च के आधार पर उपयोग प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य होगा। राज्य सरकार का मानना है कि स्मार्ट मीटर परियोजना से बिजली आपूर्ति प्रणाली अधिक आधुनिक, पारदर्शी और उपभोक्ता हितैषी बनेगी, साथ ही ऊर्जा प्रबंधन में भी उल्लेखनीय सुधार होगा।
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