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दीघा से बेदखल ओडिया व्यापारियों की वापसी का रास्ता साफ
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बंगाल–ओडिशा सीमा पर तनाव कम होने की उम्मीद
भुवनेश्वर/बालेश्वर। पश्चिम बंगाल के समुद्री पर्यटन स्थल दीघा से ओड़िया व्यापारियों को हटाए जाने के बाद ओडिशा में उठे कड़े प्रतिरोध का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। भारी विरोध और राजनीतिक दबाव के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने अपना पुराना निर्णय वापस लेते हुए बेदखल किए गए व्यापारियों को फिर से दिगा में अपनी दुकानें और कारोबार चलाने की अनुमति देने का आश्वासन दिया है।
इस संबंध में भोगराई (बालेश्वर) के प्रतिनिधियों, स्थानीय लोगों और व्यापारियों की पश्चिम बंगाल प्रशासन के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में टीएमसी समर्थित सरपंच सहित कई जनप्रतिनिधि शामिल थे। वहां अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बेदखली का आदेश वापस ले लिया गया है और जिन ओड़िया व्यापारियों को हटाया गया था, उन्हें अपने मूल स्थानों पर लौटने की अनुमति दी जाएगी।
व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में ऐसी कार्रवाई दोबारा की गई तो वे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
दीघा जगन्नाथ मंदिर के पास हटाए गए थे ओड़िया दुकानदार
विवाद की शुरुआत दीघा जगन्नाथ मंदिर के आसपास से हुई, जहां भोगराई क्षेत्र के कई लोग वर्षों से छोटी दुकानों के सहारे अपनी आजीविका चला रहे थे। इन दुकानों को हटाए जाने से ओडिशा में व्यापक असंतोष फैल गया था।
ओडिशा में ‘बंगाली मुक्त अभियान’ ने बढ़ाया दबाव
रिपोर्टों के अनुसार, दीघा से ओड़िया व्यापारियों की बेदखली के बाद ओडिशा के चंदनेश्वर (बालेश्वर) में जोरदार प्रतिकार शुरू हो गया। स्थानीय नेताओं व नागरिकों ने गुरुवार को “बंगाली मुक्त अभियान” नाम से एक आंदोलन खड़ा कर दिया, जिसमें चंदनेश्वर व आसपास के क्षेत्रों में कारोबार कर रहे बंगाल के व्यापारियों को हटाने की मांग उठी। बताया जा रहा है कि इस अभियान के दबाव और बढ़ते तनाव ने पश्चिम बंगाल प्रशासन को अपने निर्णय की समीक्षा करने के लिए मजबूर कर दिया।
तनाव में कमी की उम्मीद
पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा ओडिया व्यापारियों को दीघा में पुनः बसाने के आश्वासन के बाद चंदनेश्वर का प्रतिकार आंदोलन भी वापस ले लिया गया। दोनों राज्यों के सामुदायिक नेताओं ने उम्मीद जताई है कि यह समाधान सीमा क्षेत्रों में तनाव कम करेगा और दोनों राज्यों के व्यापारियों के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देगा। यह घटनाक्रम न केवल व्यापारियों की आजीविका से जुड़ा है, बल्कि ओडिशा-बंगाल सीमा पर सामाजिक और आर्थिक संतुलन बनाए रखने का भी महत्वपूर्ण संकेत देता है।
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