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हथियार डालने वालों को अब मिलेगी अधिक आर्थिक सहायता
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2026 तक माओवादी समाप्त करने का लक्ष्य
भुवनेश्वर। राज्य में माओवादी गतिविधियों को कमजोर करने और उग्रवादियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ओडिशा सरकार ने माओवादी सरेंडर एवं पुनर्वास नीति में बड़ा संशोधन किया है। सरकार ने सरेंडर करने वाले माओवादियों के लिए आर्थिक सहायता राशि में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है।
नई नीति के तहत, एके-47 के साथ आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को अब 4.95 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी, जबकि पहले यह राशि 3.30 लाख रुपये थी। इसी तरह, एसएलआर रायफल के साथ सरेंडर करने वाले, जिन्हें पहले 1.65 लाख रुपये मिलते थे, अब उन्हें भी 4.95 लाख रुपये की सहायता मिलेगी।
इनामी माओवादियों के लिए विशेष पैकेज
जिन माओवादियों पर 10 लाख रुपये या उससे अधिक का इनाम घोषित है, उन्हें आत्मसमर्पण करने पर 5 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। इतना ही नहीं, उनके खिलाफ दर्ज सभी मामूली मामलों को वापस लिया जाएगा, जिससे उन्हें समाज में नए सिरे से जीवन शुरू करने का अवसर मिल सके।
उग्रवादियों के लिए बड़ा मौका
अधिकारियों के अनुसार, यह फैसला उन उग्रवादियों के लिए बड़ा मौका है जो हिंसा और जंगल की जिंदगी छोड़कर लोकतांत्रिक प्रणाली में लौटना चाहते हैं। राज्य सरकार ने इसे ‘आखिरी अवसर’ के रूप में पेश किया है, ताकि अधिक से अधिक माओवादी हथियार छोड़ें और शांतिपूर्ण जीवन अपनाएं।
राज्य में माओवादी पकड़ कमजोर करने की बड़ी रणनीति
माओवाद से प्रभावित जिलों में शांति बहाल करने और विकास को बढ़ावा देने के लिए सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि यह संशोधित नीति आने वाले महीनों में सकारात्मक परिणाम देगी। इसी दिशा में, ओडिशा पुलिस कंधमाल जिले से बड़े स्तर पर एंटी-नक्सल अभियान शुरू करने जा रही है। ओडिशा पुलिस का लक्ष्य है कि 31 मार्च 2026 तक राज्य से माओवादी गतिविधियों को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाए।
ओडिशा में 80-85 माओवादी सक्रिय
राज्य के डीजीपी वाईबी खुरानिया, जिन्होंने कंधमाल में एंटी-नक्सल तैयारी की समीक्षा की, ने बताया कि फिलहाल ओडिशा में 80-85 माओवादी सक्रिय हैं, जिनमें केवल 5 ओडिया हैं, जबकि बाकी अन्य राज्यों से जुड़े हैं। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की इस संयुक्त पहल से उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले वर्षों में राज्य पूरी तरह से माओवादी हिंसा से मुक्त हो सकेगा और प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति व विकास स्थापित किया जा सकेगा।
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